भारत के उपभोक्ता: आशावाद की लहर पर सवार, वैश्विक चिंताओं से बेफिक्र
सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में शानदार उछाल के दम पर भारतीय उपभोक्ताओं का विश्वास साल भर बुलंदी पर रहा है। 61% भारतीय उपभोक्ता आने वाले समय को लेकर उत्साहित हैं, जो भारत को दुनिया के सबसे आशावादी बाजारों में से एक के रूप में स्थापित करता है।
वैश्विक तूफानों का भी असर नहीं
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) की ‘ग्लोबल कंज्यूमर रडार’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत के उपभोक्ता मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों से जरा भी विचलित नहीं दिखते। सिर्फ 17% उपभोक्ताओं का मानना है कि वैश्विक संघर्ष या राजनीतिक उथल-पुथल से देश की आर्थिक रफ्तार धीमी होगी। यह आंकड़ा चीन के बाद सबसे कम है, जबकि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे विकसित देशों में 60% से अधिक उपभोक्ता चिंतित हैं।
आशावाद की परिभाषा: 61% बेहतर भविष्य की ओर
बीसीजी की रिपोर्ट में विकसित देशों (फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, अमेरिका, जापान) और विकासशील देशों (मेक्सिको, ब्राजील, भारत, चीन) को शामिल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, 61% भारतीय उपभोक्ता अच्छे दिनों की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं 34% बेरोजगारी या मंदी के साये से आशंकित हैं।
सकारात्मकता का संगम: 27% की आशावादी सोच
कुल मिलाकर, 27% भारतीय उपभोक्ता आशावाद का परचम लहरा रहे हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत (-12%) से कहीं अधिक है, जिससे भारत एक बार फिर चीन के बाद दूसरे स्थान पर मजबूती से खड़ा है। यह आशावाद भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत संकेत है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अपनी राह बनाने में सक्षम है।
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