भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: भारतीय दिग्गजों ने इसे बताया वैश्विक शक्ति बनने की ओर ‘बड़ा कदम’
भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते ने भारतीय उद्योग जगत के गलियारों में एक नई ऊर्जा फूंक दी है। मंगलवार को देश के कॉरपोरेट दिग्गजों ने एक सुर में कहा कि यह संधि भारत की विकास संबंधी महत्वाकांक्षाओं को रॉकेट जैसी गति प्रदान करेगी। उद्योगपतियों का मानना है कि इस कदम से न केवल भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, बल्कि देश को दुनिया के प्रमुख विनिर्माण और नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित होने में भी मदद मिलेगी।
भारती एंटरप्राइजेज के सुनील मित्तल, आदित्य बिड़ला समूह के कुमार मंगलम बिड़ला और महिंद्रा समूह के अनीश शाह जैसे दिग्गजों ने इस समझौते को द्विपक्षीय निवेश के परिदृश्य को बदलने वाला बताया। महिंद्रा ग्रुप के सीईओ और प्रबंध निदेशक अनीश शाह ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह व्यापारिक और निवेश संबंधों को सशक्त बनाने की दिशा में एक ‘क्रांतिकारी कदम’ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मजबूत होती भारतीय अर्थव्यवस्था के बीच यह सौदा देश की विकास यात्रा को एक सार्थक और नई गति प्रदान करेगा।
भारती एंटरप्राइजेज के संस्थापक सुनील भारती मित्तल ने इसे दोनों देशों के लिए एक ‘बहुप्रतीक्षित उपलब्धि’ करार दिया। उनके अनुसार, यह समझौता निवेश और प्रगति के असीमित द्वार खोलता है। मित्तल ने आगे कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों की यह लगातार बढ़ती श्रृंखला इस बात का जीवंत प्रमाण है कि भारत अब वैश्विक व्यापारिक ढांचे के केंद्र में अपनी मजबूत भूमिका निभा रहा है, जिसका लक्ष्य एक टिकाऊ अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रूपरेखा तैयार करना है।
आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने इस बात पर खुशी जताई कि टैरिफ (शुल्क) में कमी आने से दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते और अधिक गहरे होंगे। अमेरिका में सबसे बड़े भारतीय निवेशक के तौर पर अपने समूह का हवाला देते हुए बिड़ला ने कहा कि यह समझौता अधिक लचीली सप्लाई चेन बनाने, विनिर्माण के नए अवसर तलाशने और दोनों देशों की दीर्घकालिक आर्थिक ताकत को बढ़ाने में सहायक होगा।
इसी क्रम में, टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन सुदर्शन वेणु ने अमेरिकी जवाबी शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने के फैसले को ‘मास्टरस्ट्रोक’ बताया। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय निर्यात की ताकत बढ़ेगी और आपसी विश्वास गहरा होगा। वेणु के अनुसार, यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में बड़ा कदम है, जो चुनौतीपूर्ण वैश्विक हालातों में भी भारतीय उद्योगों को विस्तार, नवाचार और रोजगार सृजन में मदद करेगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने लिखा, “यह समझौता बताता है कि धैर्य के साथ आगे बढ़ने के क्या लाभ होते हैं। जब शोर थमता है, तो दो स्वाभाविक साझेदार आखिरकार एक साथ आ ही जाते हैं।”
वहीं, आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने इसे सरकार की बड़ी कूटनीतिक जीत बताया। उन्होंने पोस्ट किया, “पहले यूरोपीय संघ के साथ ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ और अब अमेरिका के साथ ‘फादर ऑफ ऑल डील्स’—प्रधानमंत्री मोदी सरकार की यह एक शानदार उपलब्धि है! वाकई, धैर्य का फल मीठा होता है।” स्पाइसजेट के अजय सिंह ने भी सुर मिलाते हुए कहा कि ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बाद अमेरिका के साथ यह संधि वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते आत्मविश्वास और विश्वसनीयता पर मुहर लगाती है।
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