RBI की अगली चाल: क्या रेपो रेट में होगी कोई हलचल?
मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति घोषणा के इर्द-गिर्द चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत रेपो दर को 5.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रख सकता है, साथ ही अपने मौजूदा ‘तटस्थ’ रुख को भी बनाए रखने की संभावना है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है, “हमें उम्मीद है कि RBI दिसंबर 2025 में रेपो रेट को 5.50 परसेंट पर स्थिर रखेगा। रुख के भी न्यूट्रल बने रहने की उम्मीद है।”
मुद्रास्फीति में नरमी, क्या दर कटौती की बनेगी गुंजाइश?
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केयरएज ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। एजेंसी का मानना है कि मुद्रास्फीति में आई तेज गिरावट और अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि को देखते हुए, आरबीआई अपनी आगामी दिसंबर मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की घोषणा कर सकता है। केयरएज के अनुसार, अक्टूबर में मुद्रास्फीति दस साल के निचले स्तर 0.3 प्रतिशत पर आ गई है, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से काफी नीचे है। ऐसी स्थिति में, रिपोर्ट दर कटौती के लिए नीतिगत गुंजाइश का संकेत देती है, जबकि वर्तमान रेपो दर 5.5 प्रतिशत पर स्थिर है।
मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के कारक और जीडीपी का अनुमान
केयरएज ने मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बनाए रखने वाले प्रमुख कारकों के रूप में कच्चे तेल की स्थिर कीमतों, रबी की अच्छी बुवाई और चीन में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता का उल्लेख किया है। ये सभी कारक मुद्रास्फीति को अनियंत्रित होने से रोकने में मदद करेंगे।
आर्थिक वृद्धि की बात करें तो, वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद, केयरएज का मानना है कि दूसरी छमाही में वृद्धि दर लगभग सात प्रतिशत पर स्थिर हो सकती है। इसका मुख्य कारण निर्यात पर बना दबाव और त्योहारी सीजन के बाद उपभोग में आने वाली सुस्ती को बताया गया है। रिपोर्ट ने पूरे वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.5 प्रतिशत पर टिकाए रखा है।
आगे की मॉनेटरी सपोर्ट की आवश्यकता और MPC का रुख
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि भविष्य में अतिरिक्त मौद्रिक समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है, खासकर यदि मौजूदा टैरिफ से संबंधित चुनौतियाँ बनी रहती हैं। वर्तमान दर को बनाए रखने से पिछली दर में की गई कटौती के प्रभावों को वित्तीय प्रणाली में पूरी तरह से अवशोषित होने के लिए अधिक समय मिलेगा। हाल के आर्थिक संकेतकों को ध्यान में रखते हुए, रिपोर्ट उम्मीद जताती है कि मौद्रिक नीति समिति (MPC) अपने विकास अनुमानों को बढ़ा सकती है, वहीं मुद्रास्फीति के अनुमानों को नीचे की ओर संशोधित करने की संभावना है।
पिछली बैठक और आगामी घोषणा
यह ध्यान देने योग्य है कि अक्टूबर में हुई पिछली नीतिगत बैठक में भी आरबीआई की समिति ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो दर को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा था। एमपीसी की अगली बैठक 3 दिसंबर से 5 दिसंबर तक निर्धारित है, और नीतिगत फैसले की घोषणा 5 दिसंबर को सुबह 10 बजे आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा द्वारा की जाएगी।
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