मनरेगा में गड़बड़ियों पर केंद्रीय मंत्री का कड़ा रुख: पंजाब में फर्जी रोजगार कार्डों की होगी जांच
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कथित गड़बड़ियों और फर्जी रोजगार कार्डों की शिकायतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि एक केंद्रीय दल इस मामले की गहराई से जांच करेगा। राज्य के एक दिवसीय दौरे पर आए चौहान ने आप सरकार द्वारा केंद्र पर 1,600 करोड़ रुपये का बाढ़ राहत कोष जारी न करने के आरोप को भी सिरे से खारिज कर दिया।
जालंधर में संवाददाताओं से मुखातिब होते हुए, श्री चौहान ने मनरेगा के कार्यान्वयन की समीक्षा का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में केंद्र सरकार ने पंजाब को मनरेगा के तहत 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की थी। हालांकि, मंत्री ने स्वीकार किया कि उन्हें राज्य में योजना के कार्यान्वयन को लेकर मजदूरों से कई शिकायतें मिली हैं।
“नकली रोजगार कार्डों का इस्तेमाल हो रहा है, काम ठेकेदारों द्वारा किया जा रहा है, जबकि जरूरतमंद मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं, जिनकी हमने आज समीक्षा की है,” श्री चौहान ने कहा। उन्होंने यह भी बताया कि मुक्तसर और फाजिल्का सहित कई जिलों से मनरेगा के कार्यों के संबंध में उन्हें शिकायतें प्राप्त हुई हैं।
मंत्री ने इस मुद्दे की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा, “यह एक गंभीर मामला है। मैंने राज्य सरकार से इस मामले की जांच करने और दोषियों को सजा देने की अपील की है। यह पैसा ठेकेदारों के लिए नहीं, बल्कि मजदूरों को काम देने के लिए है।”
कृषि मंत्री का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे श्री चौहान ने आश्वासन दिया कि भारत सरकार की एक टीम इन आरोपों की गहन जांच करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मनरेगा के कार्यान्वयन में कोई भी गड़बड़ी न हो, दोषियों को दंड मिले और जरूरतमंद मजदूरों को उनका हक मिले।
आप सरकार के इस दावे के जवाब में कि 1,600 करोड़ रुपये की बाढ़ राहत राशि जारी नहीं की गई है, श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि राज्य को पहले ही 480 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि फंड लगातार जारी किए जा रहे हैं और पंजाब के लिए किसी भी तरह की धन की कमी नहीं है।
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