AMN. राजस्थान के दिहाड़ी मजदूरों के लिए अच्छी खबर है. अब राजस्थान हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में बड़ा फैसला लिया है. हाईकोर्ट ने मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि दिहाड़ी मजदूरों (दैनिक वेतन भोगी) की न्यूनतम मजदूरी की गणना 26 दिनों के बजाय महीने के 30 दिनों के आधार पर की जाए। इस दौरान कोर्ट ने न्यूनतम वेतन भुगतान से संबंधित अधिसूचनाओं और परिपत्रों में आवश्यक संशोधन करने का भी आदेश दिया है. जिससे उनकी मजदूरी में बढ़ोतरी होगी. खबरों के मुताबिक जस्टिस अनुप कुमार ढांड ने मंगलवार को बेलदार लक्ष्मण कुमावत की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया है.
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि दिहाड़ी मजदूरों को साप्ताहिक अवकाश या सवैतनिक अवकाश नहीं मिलता है. इसीलिए वह अपनी रोटी कमाने के लिए हर दिन काम करता है, इसलिए 26 कार्य दिवसों के आधार पर आय की गणना करना उचित नहीं है।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि श्रम कानून और फैक्ट्री अधिनियम में 26 कार्य दिवस और 4 सवेतन अवकाश का प्रावधान है, जो कई उद्योगों में लागू है। लेकिन दिहाड़ी मजदूरों को न तो साप्ताहिक अवकाश मिलता है और न ही छुट्टी का वेतन। इन मजदूरों के लिए छुट्टी का मतलब है उनकी कमाई पर मार.
कोर्ट ने यह फैसला लक्ष्मण कुमावत के पक्ष में दिया है.
आपको बता दें कि अगस्त 2020 में दिहाड़ी मजदूर बेलदार लक्ष्मण कुमावत सड़क दुर्घटना में घायल हो गया था तो ब्यावर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 26 दिन के आधार पर उसकी आय की गणना कर मुआवजा तय किया था. इसे कुमावत ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इस पर कोर्ट ने न्यूनतम वेतन के रूप में 30 दिन से गिनकर मुआवजे में 33,040 रुपये की बढ़ोतरी का आदेश दिया.
पीसी:गाँवसवेरा
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