भारतीय रुपया, चार महीने की सबसे बड़ी छलांग के साथ, मजबूती की राह पर!
बुधवार को भारतीय रुपया एक ऐसे उछाल के साथ सामने आया, जिसने पिछले चार महीनों के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए। कुछ समय से रिकॉर्ड निचले स्तर के इर्द-गिर्द मंडरा रही मुद्रा को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सक्रिय हस्तक्षेप से एक नई ऊर्जा मिली है। बाजार के जानकारों का मानना है कि केंद्रीय बैंक ने न केवल घरेलू, बल्कि विदेशी बाजारों में भी अमेरिकी डॉलर की बिक्री की है, जिसने रुपये को मजबूती प्रदान की है।
दिन के कारोबार में, भारतीय मुद्रा ने 0.9% की प्रभावशाली बढ़त दर्ज की और डॉलर के मुकाबले 87.99 के स्तर तक पहुंच गई। यह एक अभूतपूर्व प्रदर्शन है, क्योंकि मंगलवार को यह 88.80 प्रति डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रही थी। यह एक ही दिन में जून महीने के बाद रुपये की सबसे बड़ी उछाल मानी जा रही है।
आरबीआई का स्पष्ट संदेश: स्थिरता सर्वोपरि
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप के अर्थशास्त्री अभिषेक उपाध्याय के अनुसार, “यह स्पष्ट है कि आरबीआई का मानना है कि रुपया अब पर्याप्त रूप से कमजोर हो चुका है और आगे इसे क्षेत्रीय मुद्राओं के साथ सामंजस्य बिठाते हुए स्थिर रहना चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि हाल के दिनों में आरबीआई के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है।
यह हस्तक्षेप फरवरी के उन कदमों की याद दिलाता है, जब आरबीआई ने अरबों डॉलर की बिक्री कर सट्टेबाजों को चौंका दिया था, जो रुपये की गिरावट पर दांव लगा रहे थे। पिछले तीन हफ्तों से रुपया लगभग स्थिर बना हुआ है, और यह धारणा मजबूत हो रही है कि केंद्रीय बैंक 89 प्रति डॉलर के स्तर से नीचे गिरावट को रोकने के लिए लगातार सक्रिय है।
व्यापार समझौते की उम्मीदें और मजबूत डॉलर
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के हेड ऑफ ट्रेजरी, अनिल कुमार भंसाली ने कहा, “संभावना है कि आरबीआई ने स्पॉट और ऑफशोर दोनों बाजारों में बड़ी मात्रा में डॉलर बेचे हैं, जिससे रुपये में यह तेज उछाल आया है। इसके साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच जल्द ही एक व्यापार समझौते की उम्मीद ने भी बाजार की भावना को मजबूती दी है।”
मौजूदा रिपोर्टों के अनुसार, नई दिल्ली अगले महीने तक अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को अंतिम रूप देने का प्रयास कर रही है। यह आशावाद, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदों के साथ मिलकर, रुपये को और अधिक समर्थन दे रहा है।
सामूहिक शक्ति: आरबीआई, व्यापार और वैश्विक संकेत
एमयूएफजी बैंक के वरिष्ठ मुद्रा विश्लेषक माइकल वान का मानना है कि आरबीआई का हालिया हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल रुपये को “बहुत तेजी से कमजोर” नहीं होने देना चाहता। उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते की उम्मीदें, आरबीआई की सक्रियता और कमजोर अमेरिकी डॉलर का माहौल – इन तीनों कारकों ने मिलकर रुपये को मजबूती प्रदान की है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि रुपया लगातार 88.10 प्रति डॉलर के स्तर से ऊपर बना रहता है, तो आने वाले दिनों में यह 87 प्रति डॉलर के स्तर की ओर बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, आरबीआई के निर्णायक हस्तक्षेप, वैश्विक आर्थिक रुझानों और सकारात्मक व्यापारिक अपेक्षाओं ने भारतीय रुपये को एक बार फिर से मजबूती का सहारा दिया है।
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