भारतीय पूंजी बाजार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी में सेबी (SEBI) पूरी सक्रियता से जुटा है। भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स इन्वेस्टर्स फोरम में संबोधित करते हुए तुहीन कांता पांडेय ने शनिवार को स्पष्ट किया कि नियामक का उद्देश्य देश के बाजारों को अधिक सुगम, कुशल और लचीला बनाना है। उन्होंने जोर दिया कि सेबी का पूरा ध्यान पूंजी निर्माण को बढ़ावा देने, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को सरल बनाने और निवेशकों के हितों को अभेद्य सुरक्षा प्रदान करने पर केंद्रित है।
बाजार की विशालता का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में बाजार पूंजीकरण में जबरदस्त उछाल आया है। वर्तमान में कंपनियां इक्विटी और ऋण के माध्यम से सालाना औसतन 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि जुटा रही हैं। पांडेय ने कहा, “हम व्यवसायों के लिए बाजारों को लगातार सशक्त कर रहे हैं, लेकिन हमारी उतनी ही प्राथमिकता निवेशकों की सुरक्षा भी है। एक विश्व स्तरीय बाजार वही है जो सामान्य समय में कुशल होने के साथ-साथ तनावपूर्ण परिस्थितियों में भी अडिग बना रहे।”
विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के बदलते निवेश परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए। राज्य में निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2014-15 के 12 लाख से बढ़कर आज 90 लाख के पार पहुंच गई है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनमें से लगभग 36 प्रतिशत निवेशक 30 वर्ष से कम आयु के युवा हैं, जो भारतीय शेयर बाजार के प्रति नई पीढ़ी के बढ़ते भरोसे और उत्साह को दर्शाता है।
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