‘धुरंधर’ की बॉक्स ऑफिस पर धूम, पर पाकिस्तान और खाड़ी देशों में मचा बवाल!
नई दिल्ली: रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर’ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है। अक्षय खन्ना, संजय दत्त और अर्जुन रामपाल जैसे दिग्गजों से सजी यह फिल्म भारतीय दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब रही है। हालांकि, जहां एक ओर फिल्म को भारत में ज़बरदस्त कमाई हासिल हो रही है, वहीं दूसरी ओर यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादों में घिर गई है। खासकर पाकिस्तान में फिल्म को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है, और खाड़ी देशों में तो इसे बैन भी कर दिया गया है।
पाकिस्तान में फिल्म के खिलाफ याचिका: ‘पीपीपी’ को निशाना बनाने का आरोप
फिल्म ‘धुरंधर’ के खिलाफ पाकिस्तान के कराची की एक जिला अदालत में याचिका दायर की गई है। इस याचिका में फिल्म के निर्देशक, निर्माता और पूरी टीम पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता, मोहम्मद आमिर, जो खुद को पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का कार्यकर्ता बताते हैं, का आरोप है कि फिल्म पाकिस्तान और उसकी राजनीतिक व्यवस्था की गलत छवि पेश करती है। आमिर का कहना है कि फिल्म के ट्रेलर में पीपीपी को आतंकवाद के प्रति सहानुभूति रखने वाली पार्टी के रूप में चित्रित किया गया है। साथ ही, कराची के ल्यारी इलाके को आतंकवाद से जुड़ा युद्ध क्षेत्र दिखाना भड़काऊ और तथ्यहीन है।
राजनीतिक प्रतीकों का अवैध इस्तेमाल: बेनजीर भुट्टो और पीपीपी के झंडे पर विवाद
याचिका में आगे कहा गया है कि फिल्म में पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की तस्वीरों, पीपीपी के झंडे और चुनावी रैलियों के दृश्यों का बिना अनुमति उपयोग किया गया है। याचिकाकर्ता का मानना है कि यह सब कानूनी नियमों का उल्लंघन है और इससे पार्टी के साथ-साथ देश की छवि को भी नुकसान पहुंचता है।
खाड़ी देशों में ‘धुरंधर’ पर लगा प्रतिबंध: संवेदनशील विषय बना वजह
पाकिस्तान में उठे विवाद के साथ-साथ ‘धुरंधर’ को कई खाड़ी देशों में भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में फिल्म को रिलीज़ की अनुमति नहीं मिली है। माना जा रहा है कि फिल्म की संवेदनशील राजनीतिक और आतंकवाद से जुड़ी थीम इसके पीछे की मुख्य वजह है।
पाकिस्तान से जुड़ी फिल्मों के लिए यह नया नहीं: पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान से जुड़ी किसी भारतीय फिल्म को खाड़ी देशों में बैन का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी इसी तरह की राजनीतिक और जासूसी विषयों पर बनी फिल्मों को वहां रिलीज़ की अनुमति नहीं मिल पाई है, जो दर्शाती है कि ऐसे संवेदनशील विषय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कितनी बारीकी से देखे जाते हैं।
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