दिलजीत दोसांझ का प्रेम संदेश: ‘इक ओंकार’ के सूत्र में पिरोई मानवता
गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ ने अपने गुरु की शिक्षा ‘इक ओंकार’ के सार को अपने दिल में बसाते हुए, मानवता के प्रति अपने अटूट प्रेम को व्यक्त किया है। उनका मानना है कि यह ब्रह्मांड एक अविभाज्य इकाई है, जहां सभी जीव एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और समान हैं। इस सत्य को स्वीकार करते हुए, दिलजीत ने सभी के लिए प्रेम और सद्भाव की कामना की है।
एक मार्मिक वीडियो संदेश में, दिलजीत ने पंजाबी में अपने विचार साझा किए, “हमेशा प्यार की बातें करते रहो।” उन्होंने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा, “मेरे लिए यह धरती एक है।” अपने गुरु के प्रवचन ‘इक ओंकार’ का उल्लेख करते हुए, उन्होंने इस सार्वभौमिक सत्य पर जोर दिया कि सब कुछ एक ही स्रोत से उत्पन्न होता है। “तो यह धरती एक है, और मैं इसी धरती से पैदा हुआ हूं। मैं इस धरती का जीव हूं और एक दिन इसी मिट्टी में मिल जाऊंगा।” इस गहरे जुड़ाव को महसूस करते हुए, उन्होंने घोषणा की, “इसलिए मेरी तरफ से सबके लिए सिर्फ प्यार है, चाहे कोई मुझसे जले या मुझे ट्रोल करे। मैं हमेशा प्यार का संदेश फैलाता रहूंगा। मैंने हमेशा ऐसा ही किया है। मुझे परवाह नहीं कि कोई इसके बारे में कैसा महसूस करता है।”
दिलजीत ने जीवन में आत्म-प्रेरणा और विश्वास के महत्व पर भी प्रकाश डाला। “एक व्यक्ति को बस अपने दिल में सोचना चाहिए कि उसे क्या करना है। सिर्फ सोचना चाहिए। भगवान उसे पूरा करेंगे। आपको इसे अपने दिल में रखना चाहिए।” यह कथन इस बात पर जोर देता है कि मनुष्य के अपने इरादे और विश्वास ही उसके भविष्य को आकार देते हैं, और दैवीय शक्ति उन सपनों को साकार करने में सहायता करती है जो ईमानदारी से हृदय में पोषित होते हैं।
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