सिनेमा के पर्दे पर अपनी संवेदनाओं और कहानियों से दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली मशहूर फिल्म निर्देशक मीरा नायर आज एक ऐसी फिल्म की वजह से नहीं, बल्कि एक विवादित ‘फाइल’ की वजह से सुर्खियों में हैं। ‘मॉनसून वेडिंग’ और ‘द नेमसेक’ जैसी कालजयी कृतियों की रचनाकार मीरा नायर का नाम अप्रत्याशित रूप से कुख्यात ‘एप्सटीन फाइल्स’ से जुड़ गया है। दिलचस्प बात यह है कि प्रतिष्ठित फिल्मकार होने के साथ-साथ वह न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल के सदस्य जोहरान ममदानी की माँ भी हैं, जिससे इस घटनाक्रम के राजनीतिक और सामाजिक मायने और गहरे हो गए हैं। हाल ही में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों में 2009 के एक ईमेल का खुलासा हुआ है, जिसमें एक सामाजिक आयोजन के संदर्भ में मीरा नायर का नाम दर्ज है।
जेफ्री एप्सटीन फाइल्स ने दुनिया भर के गलियारों में हलचल मचा रखी है, जिसमें राजनीति से लेकर मनोरंजन जगत के कई कद्दावर चेहरों के नाम सामने आए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मीरा नायर का उल्लेख कुछ ईमेल संवादों में मिला है, जो कथित तौर पर एक हाई-प्रोफाइल पार्टी से संबंधित थे। इस खुलासे ने न केवल प्रशंसकों को चौंका दिया है, बल्कि उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व और सामाजिक दायरे को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यह ईमेल उस दौर की याद दिलाता है जब रसूखदार लोगों के सामाजिक मिलन के केंद्र में अक्सर एप्सटीन जैसे विवादित चेहरे मौजूद रहते थे।
साल 2009 के उस ईमेल संवाद ने अब अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। चूंकि जेफ्री एप्सटीन पर यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे संगीन जुर्म साबित हो चुके थे, इसलिए उनके इर्द-गिर्द रहने वाले किसी भी नाम पर अब सवाल उठना लाजिमी है। हालांकि, मीरा नायर ने इस पूरे मामले पर अब तक चुप्पी साध रखी है, लेकिन उनके बेटे जोहरान ममदानी ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जोहरान ने ऐसे विवादित संबंधों के ‘नॉर्मलाइजेशन’ का विरोध करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की कड़ी वकालत की है। इस खबर ने मनोरंजन जगत के दिग्गजों और उनके रसूखदार सामाजिक संपर्कों के बीच की धुंधली सीमाओं पर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
जैसे-जैसे एप्सटीन फाइल्स की परतें खुल रही हैं, सवाल यह है कि क्या यह महज एक इत्तेफाक था या इसके गहरे निहितार्थ हैं? मीरा नायर की शानदार विरासत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह तो भविष्य ही तय करेगा। लेकिन यह घटनाक्रम इस कड़वे सच को उजागर करता है कि सार्वजनिक जीवन जीने वाले लोगों का नाम कब और कैसे अनचाहे विवादों की भेंट चढ़ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता—भले ही उनका पेशेवर सफर कितना भी बेदाग क्यों न रहा हो।
मीरा नायर का भारतीय और वैश्विक सिनेमा में योगदान अतुलनीय है, परंतु एप्सटीन फाइल्स में उनके नाम का आना यह दर्शाता है कि ‘सेलिब्रिटी कल्चर’ की चकाचौंध के पीछे रिश्तों के कितने जटिल ताने-बाने बुने होते हैं। ऐसे मामले न केवल सामाजिक नैतिकता पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि यह भी याद दिलाते हैं कि पारदर्शिता और जिम्मेदारी ही किसी भी सार्वजनिक छवि की असली बुनियाद होती है।
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