मृणाल सेन के निर्देशन की जादुई दुनिया से ‘कलकत्ता 71’, ‘पदातिक’, ‘मृगया’, ‘खारिज’, ‘खंडहर’ और ‘एक दिन अचानक’ जैसी कालजयी फिल्में निकलकर आईं। उन्होंने न केवल सिनेमा को नई दिशा दी, बल्कि कई गुमनाम चेहरों को सितारों में बदल दिया। फिल्म ‘मृगया’ के जरिए उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती को वह बड़ा मंच दिया, जिसने उन्हें उनका पहला नेशनल अवॉर्ड दिलाया। इसके साथ ही, स्मिता पाटिल, शबाना आजमी, नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी जैसे दिग्गज कलाकारों की प्रतिभा को निखारने में भी मृणाल सेन का अहम योगदान रहा।
सिनेमा के प्रति उनके अटूट समर्पण के लिए उन्हें दादा साहेब फाल्के और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उनकी कला की गूँज सात समंदर पार कांस, बर्लिन और वेनिस जैसे अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी सुनाई दी, जहाँ उनकी फिल्मों ने ढेरों पुरस्कार जीते। 30 दिसंबर 2018 को कला का यह चमकता सितारा हमेशा के लिए विलीन हो गया। 95 वर्ष की आयु में, कोलकाता स्थित अपने आवास पर दिल का दौरा पड़ने के कारण उन्होंने जीवन की अंतिम सांस ली।
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