जुबीन गर्ग की रहस्यमयी मौत: सिंगापुर की यॉट पार्टी और ‘भूतिया’ लाजरस द्वीप का अनसुलझा सच
नई दिल्ली: असम के सांस्कृतिक आइकन और ‘असम की आवाज़’ कहे जाने वाले जुबीन गर्ग का 19 सितंबर 2025 को सिंगापुर के लाजरस द्वीप पर डूबने से निधन, न केवल पूर्वोत्तर भारत को शोक में डुबो गया, बल्कि कई अनसुलझे रहस्यों की चादर भी ओढ़ा गया। जुबीन की पत्नी, गरिमा सैकिया गर्ग ने सिंगापुर पुलिस की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को चुनौती देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं।
गरिमा का दावा है कि जुबीन को यॉट पार्टी में जबरन ले जाया गया था, जबकि उनकी मेडिकल हिस्ट्री को जानते हुए भी कोई सावधानी नहीं बरती गई। उन्होंने द्वीप को ‘भूतिया’ बताते हुए सवाल किया कि जुबीन को ऐसी जगह पर क्यों ले जाया गया? जुबीन की मौत के 14 दिन बाद भी यह विवाद थमा नहीं है, और प्रशंसकों ने गूगल मैप्स पर द्वीप का नाम बदलकर ‘जुबीन गर्ग द्वीप’ कर भावुक श्रद्धांजलि दी है।
आइए, इस दुखद घटना, गरिमा के दावों और लाजरस द्वीप के रहस्यमयी इतिहास को विस्तार से समझते हैं…
जुबीन गर्ग अपडेट: सिंगापुर यात्रा से त्रासदी तक का काला अध्याय
52 वर्षीय जुबीन गर्ग सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (NEIF) में हिस्सा लेने गए थे, जो भारत-सिंगापुर के 60 वर्षों के राजनयिक संबंधों का हिस्सा था। 19 सितंबर को वे सेंट जॉन्स द्वीप (जो लाजरस द्वीप का हिस्सा है) के पास यॉट पर दोस्तों के साथ नौका विहार कर रहे थे।
गरिमा के अनुसार, जुबीन ने पहली बार लाइफ जैकेट पहनकर तैराकी की और सुरक्षित लौट आए। लेकिन दूसरी बार वे बिना जैकेट के पानी में उतरे, और अचानक दौरे (seizure) पड़ने से बेहोश होकर डूब गए। सिंगापुर पुलिस ने उन्हें समुद्र से निकालकर सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल ले जाया, लेकिन दोपहर 2:30 बजे (IST) तक डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
जुबीन गर्ग पोस्टमार्टम: जुबीन गर्ग के दो पोस्टमॉर्टम, क्या निकला?
सिंगापुर पुलिस की पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ‘डूबना’ (drowning) बताया गया, और फाउल प्ले से इनकार किया। लेकिन असम में संदेह की लहर उठी। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जुबीन की पत्नी गरिमा ने कहा, ‘जुबीन को दौरा पड़ने की पुरानी बीमारी थी। डॉक्टरों ने पानी या आग के पास न जाने की सलाह दी थी। फिर भी, उन्हें यॉट पार्टी में जबरन ले जाया गया।’ उन्होंने वीडियो का हवाला दिया, जिसमें जुबीन थके हुए नजर आते हैं। असम सरकार ने दूसरा पोस्टमॉर्टम करवाया, जो भी डूबने की पुष्टि करता है। CM हिमंता बिस्वा सरमा ने SIT गठित की, और जुबीन के मैनेजर सिद्धार्थ शर्मा व फेस्टिवल ऑर्गेनाइजर श्यामकानु महंत को गिरफ्तार किया। परिवार ने CID में शिकायत दर्ज कराई, और जांच में चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
जुबीन गर्ग की पत्नी गरिमा: ‘जुबीन को जबरन ले जाया गया, कोई मेडिकल हेल्प क्यों नहीं?’
गरिमा ने आंसुओं के बीच सवालों की बौछार की। उन्होंने बताया कि जुबीन से आखिरी बात 18 सितंबर को हुई थी। ‘सिंगापुर पहुंचकर उन्होंने मैसेज किया, लेकिन यॉट पार्टी का जिक्र नहीं। पिछली रात वे संगीत संध्या में गा रहे थे। अगली सुबह अचानक उन्हें पानी में उतार दिया गया – बिना कपड़े बदले। मुझे लगता है, उन्हें जबरन ले जाया गया।’ गरिमा ने आयोजकों पर लापरवाही का आरोप लगाया। श्यामकानु महंत खुद को ‘परिवार’ बताते थे। एसोसिएशन के 10-15 सदस्य मौजूद थे।
गरिमा ने उठाए ये 5 सवाल:
- किसी ने चिकित्सा सहायता क्यों नहीं दी?
- अमृतप्रभा महंत ने वीडियो बनाए, लेकिन हमें या पुलिस को क्यों नहीं बताया?
- जुबीन की बीमारी 2020 से टीम को पता थी। मीडिया में भी छपा था। फिर भी, कोई लाइफ जैकेट या डॉक्टर क्यों नहीं?
- जब मैनेजर का फोन आया, तो सहयोगी सिद्धार्थ रोते हुए ‘दादा’ कह रहा था। ‘मैंने CPR सुना। जुबीन को कभी दिल की समस्या नहीं थी। अस्पताल पहुंचने में 1 घंटा क्यों लगा?’
- क्या वे पहले ही मृत हालत में लाए?
गरिमा ने SIT और CM पर भरोसा जताया। ‘सरकार गंभीर है। सच्चाई जल्द सामने आएगी।’ लेकिन उनका दर्द साफ था: ‘जुबीन सब पर भरोसा करते थे। वे असम की धड़कन थे। ऐसी लापरवाही अक्षम्य है।’
लाजरस द्वीप का रहस्य: ‘भूतिया’ किंवदंतियों से भरा इतिहास
गरिमा ने द्वीप को ‘भूतिया’ बताते हुए सवाल उठाया, ‘इंटरनेट पर पता चला कि लाजरस द्वीप कोविड क्वारंटाइन साइट था, और कब्रिस्तान। स्थानीय लोग वहां फुर्सत के पल नहीं बिताते। पहले भी डूबने की घटनाएं हुई हैं। जुबीन को होटल में क्यों नहीं रखा? वे पहले भी सिंगापुर आए, हमेशा होटल में ही रहते।’
लाजरस द्वीप (सेंट जॉन्स द्वीप का हिस्सा) सिंगापुर के दक्षिणी तट पर एक छोटा-सा द्वीप है, जो सुंदरता और रहस्य का संगम है। दिन में नारियल के पेड़ों से घिरा, सुनहरी रेत वाला यह द्वीप पर्यटकों को लुभाता है। लेकिन इतिहास अंधेरे से भरा: 19वीं सदी में यह संगरोध केंद्र था, जहां बीमारियों (कोलेरा, प्लेग) से ग्रस्त लोगों को अलग किया जाता था। अनगिनत लोग यहां मरे, और शव कभी मुख्य भूमि लौटे ही नहीं। 1900 के दशक में यह अफीम नशेड़ियों की जेल बना, और 1910 में विनाशकारी आग ने द्वीप को तबाह कर दिया। 2016 तक आखिरी निवासी चले गए, और अब यह ज्यादातर वीरान है।
स्थानीय किंवदंतियां द्वीप को ‘भूतिया’ बनाती हैं – पेड़ों में परछाइयां, रात की ठंडी हवाएं, फुसफुसाहटें। लोग कहते हैं कि डूबने और गायब होने की घटनाएं आम हैं। गरिमा का सवाल सटीक: ‘जुबीन को उत्सव के लिए बुलाया, लेकिन भूतिया द्वीप पर क्यों? क्या पानी में कुछ है?’ यह विरोधाभास जुबीन के जीवन से टकराता है।
जुबीन की विरासत: दुःख में भी उम्मीद
गरिमा ने जुबीन की फिल्म (अंधे संगीतकार की भूमिका) को 31 अक्टूबर को रिलीज करने का ऐलान किया। ‘यह उनके दिल के करीब थी। कम से कम इतना तो करूंगी।’ जुबीन का सपना था – एकता, प्रेम, बिना हिंदू-मुस्लिम विभाजन का असम। ‘वे प्रकृति के उपासक थे। प्रशंसक उनकी रचनात्मकता को आगे बढ़ाएँ।’ गरिमा ने कहा, ‘जुबीन बच्चे जैसे थे – सब पर भरोसा, सबकी मदद। दुनिया के लिए लीजेंड, मेरे लिए दोस्त।’
सवालों का द्वीप, सच्चाई की तलाश
जुबीन की मौत लाजरस द्वीप के इतिहास से जुड़कर और रहस्यमयी हो गई। गरिमा के सवाल – जबरन पार्टी, लापरवाही, भूतिया द्वीप – जांच को दिशा देंगे। असम शोक में है, लेकिन गरिमा की आवाज सच्चाई की मांग कर रही है। क्या SIT से जवाब मिलेंगे? जुबीन की आत्मा को शांति मिले।
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