बिहार के मखाना किसानों के लिए ‘स्वर्ण’ अवसर!
बिहार के किसानों की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है, और इसी कड़ी में मखाना किसानों के लिए एक सुनहरा अध्याय शुरू होने वाला है। अब उन्हें ‘स्वर्ण वैदेही’ और ‘सबौर मखाना-1’ जैसे उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। ये विशेष बीज मखाना उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि करेंगे, जिससे बिहार के किसान वैश्विक बाजार में बढ़ रही मखाने की मांग को पूरा कर अपनी आय में कई गुना इजाफा कर सकेंगे।
इस महत्वाकांक्षी पहल को ‘एकीकृत बागवानी विकास मिशन’ के तहत ‘मखाना अवयवों की योजना’ के रूप में वर्ष 2025-27 तक के लिए मंजूरी मिली है। इसका लक्ष्य उन्नत बीजों – स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-1 – के माध्यम से खेती को बढ़ावा देना है। विशेष रूप से, डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) में पंजीकृत नए किसानों को 75% का भारी अनुदान मिलेगा। मखाने की खेती की प्रति हेक्टेयर इकाई लागत 0.97 लाख रुपये है, जिसमें से किसानों को 75% यानी 72,750 रुपये प्रति हेक्टेयर की वित्तीय सहायता दो आसान किस्तों में प्रदान की जाएगी। यह अनुदान बीज, अन्य इनपुट और कटाई की लागत को कवर करेगा।
महिला सशक्तिकरण: 30% भागीदारी का लक्ष्य
इस योजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता है महिला सशक्तिकरण पर जोर। कुल लाभार्थियों में 30 प्रतिशत महिला किसानों की भागीदारी अनिवार्य की गई है। यह कदम न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की सक्रिय भूमिका को मजबूत करेगा, बल्कि आय वृद्धि के साथ-साथ सभी वर्गों की संतुलित और समावेशी हिस्सेदारी भी सुनिश्चित करेगा।
16 जिलों में फैलेगी समृद्धि
यह व्यापक विकास योजना बिहार के 16 प्रमुख जिलों में लागू की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। इन जिलों में कटिहार, पूर्णियां, दरभंगा, मधुबनी, किशनगंज, सुपौल, अररिया, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, समस्तीपुर, भागलपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चम्पारण, पश्चिमी चम्पारण एवं मुजफ्फरपुर शामिल हैं।
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