द्रमुक का भाषा प्रेम या विकास से पलायन? अन्नामलाई ने उदयनिधि स्टालिन पर साधा निशाना
चेन्नई: तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा संस्कृत को ‘मृत भाषा’ करार दिए जाने के बयान पर भाजपा नेता के. अन्नामलाई ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। अन्नामलाई ने आरोप लगाया कि द्रमुक सरकार विकास और सुशासन जैसे अहम मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भाषा का विवादास्पद मुद्दा उठा रही है।
‘संस्कृत को धन, वरीयता का नहीं, संख्या का परिणाम’
चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अन्नामलाई ने कहा, “हमारे देश में कोई भी किसी भाषा को अतिरिक्त धन नहीं देता। यह समझना ज़रूरी है कि संस्कृत विश्वविद्यालयों की संख्या, तमिल विश्वविद्यालयों की तुलना में अधिक है। यह यूपीए शासन के दौरान की स्थिति है। परिणामस्वरूप, संस्कृत विश्वविद्यालयों को अपनी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए अधिक धन प्राप्त होता है।” उन्होंने आगे कहा, “तमिलनाडु सरकार से हमारा यही अनुरोध है कि वे देश में और अधिक तमिल विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव रखें। इसमें कौन रोक रहा है?”
‘विकास की बात नहीं कर सकती द्रमुक, इसलिए भाषा पर हंगामा’
अन्नामलाई ने यह भी कहा कि द्रमुक सरकार विकास और सुशासन जैसे मुद्दों पर बात करने से कतरा रही है। “इसलिए, हम अगले छह महीनों तक भाषा, उत्तर और दक्षिण के बारे में यही बकवास सुनते रहेंगे,” उन्होंने कहा।
उदयनिधि स्टालिन का आरोप और पीएम मोदी का ‘ तमिल प्रेम’
यह विवाद तब शुरू हुआ जब तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी पर तमिलनाडु में हिंदी और संस्कृत थोपने का आरोप लगाया। स्टालिन ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में केंद्र सरकार ने तमिल भाषा के विकास के लिए मात्र 150 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जबकि ‘मृत भाषा’ कहे जाने वाले संस्कृत के लिए 2,400 करोड़ रुपये दिए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के कोयंबटूर में बचपन में तमिल न सीख पाने पर व्यक्त खेद का भी जिक्र किया और कहा, “एक ओर वे ऐसा व्यवहार कर रहे हैं मानो उन्हें तमिल भाषा की परवाह है, दूसरी ओर वे हिंदी और संस्कृत थोपने की कोशिश कर रहे हैं। यह कैसा न्याय है?”
त्रिभाषा फॉर्मूले का दबाव?
स्टालिन ने आगे आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार स्कूली शिक्षा कोष के लिए 2500 करोड़ रुपये तभी जारी करेगी जब तमिलनाडु त्रिभाषा फॉर्मूले को लागू करेगा। उन्होंने सवाल उठाया, “यह कैसा न्याय है? प्रधानमंत्री ने पिछले 10 दिनों में तमिल भाषा के विकास के लिए क्या किया है?”
यह तीखी बयानबाजी आगामी चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक माहौल को और गरमा सकती है, जहां भाषा का मुद्दा एक संवेदनशील विषय बना हुआ है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
