Budget 2026: मोबाइल-लैपटॉप की कीमतों में भारी गिरावट? बजट से पहले इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का बड़ा अपडेट!

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Budget 2026: मोबाइल फोन, लैपटॉप सस्ता होगा या नहीं? बजट में खुल सकता है इलेक्ट्रॉनिक्स का सबसे बड़ा राज | Budget 2026 mobile phone price hike electronics expensive or cheap

यहाँ प्रस्तुत है उस लेख का एक नया, आकर्षक और रोचक रूप, जो मूल सामग्री और लंबाई को बनाए रखता है:

Budget 2026: क्या सस्ते होंगे मोबाइल और लैपटॉप या फिर बढ़ेंगे दाम? जानिए हर सवाल का जवाब

Business | oi-Pallavi Kumari

Published: Sunday, January 18, 2026, 17:37 [IST]

Budget 2026: 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब बजट पेश करेंगी, तो सिर्फ टैक्स या सरकारी योजनाएं ही नहीं, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े सवालों के जवाब भी सामने आएंगे। इन्हीं सवालों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बजट 2026 के बाद मोबाइल फोन, लैपटॉप, टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट सस्ते होंगे या फिर ये और महंगे होने वाले हैं। पूरी रिपोर्ट में जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स।

AI का ‘महंगा’ क्रेज और स्मार्टफोन

पिछले कुछ महीनों में स्मार्टफोन्स की कीमतों में साफ इजाफा देखा गया है। इसका सबसे बड़ा कारण AI (Artificial Intelligence) की बढ़ती मांग माना जा रहा है। आज के स्मार्टफोन सिर्फ कॉल और कैमरा तक सीमित नहीं रहे। AI फीचर्स के चलते इनमें ज्यादा पावरफुल प्रोसेसर और ज्यादा मेमोरी चिप्स की जरूरत पड़ रही है।

यही मेमोरी चिप्स अब AI डेटा सेंटर्स और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में भी इस्तेमाल हो रही हैं। नतीजा ये हुआ कि ग्लोबल मार्केट में मेमोरी चिप्स की भारी कमी हो गई। सप्लाई कम और मांग ज्यादा होने से कीमतें तेज़ी से बढ़ीं और इसका सीधा असर स्मार्टफोन की कीमतों पर पड़ा है।

इंडस्ट्री की बजट से उम्मीदें: सिर्फ असेंबली नहीं, अब मैन्युफैक्चरिंग चाहिए

AI+ स्मार्टफोन के CEO और Nxtquantum Shift टेक्नोलॉजीज के फाउंडर माधव सेठ का मानना है कि भारत का कंज्यूमर टेक सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर में है। उनके मुताबिक अब वक्त आ गया है कि भारत सिर्फ असेंबली तक सीमित न रहे।

उनका कहना है कि अगर बजट में कैमरा मॉड्यूल, बैटरी, PCB, एनक्लोजर, चार्जर और वियरेबल्स जैसे कोर कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया गया, तो इससे लंबी अवधि में कीमतों पर कंट्रोल किया जा सकता है। साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सिस्टम डिजाइन और सॉफ्टवेयर इनोवेशन से जुड़ी IP को भी मजबूत सपोर्ट की जरूरत है।

चिप्स की किल्लत: क्यों छप रहे हैं पुराने नोट?

आज भारत में ज्यादातर स्मार्टफोन कंपनियां असेंबली का काम करती हैं। चिप्स और कई अहम पार्ट्स के लिए चीन समेत दूसरे देशों पर निर्भरता बनी हुई है। इंडस्ट्री का मानना है कि जब तक भारत में कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग नहीं बढ़ेगी, तब तक कीमतें स्थायी रूप से कम होना मुश्किल है।

Indkal टेक्नोलॉजी के CEO आनंद दुबे के मुताबिक कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर अब भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है। इस सेक्टर से लाखों नौकरियां पैदा हो रही हैं और भारत की पकड़ ग्लोबल सप्लाई चेन में मजबूत हो रही है। बजट से उम्मीद है कि सरकार ऐसी पॉलिसी लाएगी, जिससे अब तक की रफ्तार और तेज हो सके।

आगे क्या? मार्केट एक्सपर्ट्स की भविष्यवाणी

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि कीमतों में राहत अभी आसान नहीं दिख रही। इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक अगले दो महीनों में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की कीमतों में 4 से 8 फीसदी तक का और इजाफा हो सकता है। इससे पहले नवंबर और दिसंबर में ही कई प्रोडक्ट्स 21 फीसदी तक महंगे हो चुके हैं।

Counterpoint Research के अनुसार ग्लोबल मेमोरी मार्केट इस वक्त हाइपर बुल फेज में है। पिछली तिमाही में मेमोरी कीमतों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और मौजूदा तिमाही में भी 40 से 50 फीसदी तक उछाल की आशंका है। अप्रैल से जून के बीच इसमें और 20 फीसदी बढ़ोतरी हो सकती है।

ग्राहकों पर कैसा होगा असर?

कुछ स्मार्टफोन ब्रांड्स ने जनवरी में ही दाम बढ़ा दिए हैं। Vivo और Nothing जैसे ब्रांड्स ने 3,000 से 5,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। वहीं Samsung जैसे ब्रांड्स ने सीधे दाम बढ़ाने के बजाय कैशबैक और डिस्काउंट कम कर दिए हैं।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले लॉन्च में कंपनियां पहले से ही इन बढ़ी हुई लागतों को जोड़कर कीमत तय करेंगी।

क्या टीवी और लैपटॉप भी बचेंगे?

सिर्फ स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि टीवी और लैपटॉप की कीमतें भी बढ़ रही हैं। कई रिटेलर्स के मुताबिक लैपटॉप 5 से 8 फीसदी तक महंगे हो चुके हैं। बड़े टीवी ब्रांड्स ने आगे और कीमतें बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

Super Plastronics के CEO अवनीत सिंह मारवाह का कहना है कि मेमोरी चिप्स की भारी किल्लत है। कंपनी को जरूरत का सिर्फ 10 फीसदी ही सप्लाई मिल पा रही है। नवंबर में 7 फीसदी, जनवरी में 10 फीसदी और फरवरी में 4 फीसदी की और बढ़ोतरी की योजना बनाई गई है। आने वाली रिपब्लिक डे सेल में भी डिस्काउंट बेहद सीमित रहने वाले हैं।

आम ग्राहक क्या करे? खरीदारी का सही समय

ऑल इंडिया मोबाईल रिटेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक नवंबर और दिसंबर में ही स्मार्टफोन 3 से 21 फीसदी तक महंगे हो चुके हैं। आगे चलकर कुल बढ़ोतरी 30 फीसदी तक पहुंच सकती है। इसका सबसे बड़ा असर 20,000 रुपये से कम वाले सेगमेंट पर पड़ेगा, जहां सबसे ज्यादा बिक्री होती है।

ग्राहक फिलहाल इंतजार की मुद्रा में हैं, लेकिन अगर कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो 2026 में स्मार्टफोन शिपमेंट में 10 से 12 फीसदी की गिरावट आ सकती है।

बजट 2026 में छुपा है जवाब

अब सवाल यही है कि क्या बजट 2026 मोबाइल फोन को सस्ता करेगा। शॉर्ट टर्म में बड़ी राहत की उम्मीद कम है, लेकिन अगर सरकार कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, R&D और लोकल सप्लाई चेन को मजबूती देती है, तो आने वाले वर्षों में स्मार्टफोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स आम आदमी की पहुंच में आ सकते हैं।

यानी बजट 2026 सिर्फ नंबरों का खेल नहीं होगा, बल्कि ये तय करेगा कि आने वाले वक्त में आपका अगला मोबाइल फोन सस्ता होगा या फिर और महंगा।

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English summary: Budget 2026 mobile phone price hike electronics expensive or cheap


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