दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सरकार अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेने की तैयारी में है। प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों की निगरानी के लिए AI, सेंसर, ड्रोन, सैटेलाइट और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। लक्ष्य सिर्फ प्रदूषण की निगरानी करना नहीं, बल्कि नियम तोड़ने वालों पर तेजी से कार्रवाई करना भी है।
AI से प्रदूषण के स्रोतों की होगी पहचान
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में काम कर रहे 15 स्टार्टअप्स के साथ बैठक की। इसमें प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों और उनके तकनीकी समाधान पर चर्चा हुई।
सरकार की योजना औद्योगिक उत्सर्जन, सड़क की धूल, पराली जलाने, ट्रैफिक और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर तकनीक के जरिए निगरानी बढ़ाने की है।
औद्योगिक इकाइयों के डेटा पर AI की नजर
बैठक में ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (OCEMS) के डेटा को औद्योगिक इकाइयों के संचालन संबंधी आंकड़ों के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया।
AI इन दोनों तरह के डेटा का विश्लेषण कर संभावित गड़बड़ियों और नियमों के उल्लंघन की पहचान करने में मदद कर सकता है। इससे प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों पर समय रहते कार्रवाई का रास्ता आसान हो सकता है।
धूल और ट्रैफिक की भी होगी निगरानी
प्रदूषण के खिलाफ तकनीकी निगरानी का दायरा सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल, डीजल जनरेटर और वाहनों के प्रदूषण पर भी नजर रखने की तैयारी है।
AI की मदद से प्रदूषण वाले हॉटस्पॉट की पहचान करने और ट्रैफिक जाम का पूर्वानुमान लगाने पर भी काम किया जा सकता है। इससे उन इलाकों में पहले से कदम उठाने में मदद मिलेगी, जहां प्रदूषण बढ़ने की आशंका ज्यादा हो।
पराली जलाने की घटनाओं पर 24 घंटे नजर
दिल्ली-NCR के प्रदूषण में पराली जलाने को भी एक अहम स्रोत माना जाता है। इसके लिए सैटेलाइट और अन्य तकनीकी माध्यमों से खेतों में खुले तौर पर बायोमास जलाने की घटनाओं पर चौबीसों घंटे निगरानी के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
सरकार पराली को सिर्फ प्रदूषण का कारण मानने के बजाय उसके उपयोग पर भी जोर दे रही है। इसे जैव ऊर्जा, ईंधन और खाद बनाने में इस्तेमाल करने की संभावनाओं को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
निर्माण मलबे और सड़क की धूल पर भी फोकस
प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति में निर्माण एवं विध्वंस से निकलने वाले मलबे का पुनर्चक्रण, सड़कों की मशीनीकृत सफाई और सड़क की धूल को नियंत्रित करने के उपाय भी शामिल हैं।
सरकार का जोर ऐसी तकनीक विकसित करने पर है, जिन्हें बड़े स्तर पर लागू किया जा सके। इसके लिए सरकारी एजेंसियों और स्टार्टअप्स के बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की जा रही है।
निगरानी से आगे कार्रवाई पर जोर
सरकार की रणनीति में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ आंकड़े जुटाने तक सीमित न रहे। AI और डेटा एनालिटिक्स से मिले इनपुट के आधार पर नियमों के उल्लंघन की पहचान और समय पर कार्रवाई करने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर है।
अगर यह सिस्टम प्रभावी तरीके से लागू होता है तो दिल्ली-NCR में प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों की पहचान और निगरानी पहले के मुकाबले ज्यादा तेज और सटीक हो सकती है।
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