हिमाचल में प्रलयंकारी बारिश: 417 मौतों के साथ बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त

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हिमाचल में मानसून का तांडव जारी, मृतकों का आंकड़ा 417 पहुंचा, जनजीवन अस्त-व्यस्त

हिमाचल पर टूटा कुदरत का कहर: बाढ़, भूस्खलन और बिजली-पानी की किल्लत से जूझ रहा प्रदेश

शिमला: हिमाचल प्रदेश इन दिनों मानसून की विनाशलीला से बुरी तरह प्रभावित है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश की 572 सड़कें, जिनमें दो राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं, अभी भी यातायात के लिए बंद हैं। इसके अलावा, 483 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर और 203 जलापूर्ति योजनाएं ठप पड़ गई हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

एसडीएमए ने बुधवार की सुबह जारी अपनी रिपोर्ट में बताया कि 20 जून से शुरू हुए मानसून के दौरान अब तक कुल 417 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 236 मौतें भूस्खलन, अचानक बाढ़, मकान गिरने और डूबने जैसी वर्षाजनित घटनाओं में हुईं, जबकि 181 लोगों की जान मौसम संबंधी व्यवधानों के चलते हुई सड़क दुर्घटनाओं में गई।

मुख्य सड़क मार्ग हुए ठप, जनजीवन पर गहरा असर

सड़कों पर अवरोधों का सबसे बड़ा खामियाजा किन्नौर जिले के निगुलसरी में राष्ट्रीय राजमार्ग-05 और ऊना में भदसाली पुल के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-503A भुगत रहे हैं, जो पूरी तरह से बंद हैं। कुल्लू जिले में भी स्थिति चिंताजनक है। कुल्लू-मनाली मार्ग पर कलाथ और बिंदु ढांक के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-03 और आनी व जलोरी के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-305 के कुछ हिस्सों पर आवाजाही बेहद सीमित है, जहां केवल हल्के वाहनों को ही जाने की अनुमति है।

बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित, हाहाकार

483 बिजली ट्रांसफार्मरों के ठप पड़ने से प्रदेश के कई जिलों में बिजली आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। अकेले मंडी जिले में 363 जगहों पर बिजली गुल है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पेयजल आपूर्ति भी कई इलाकों में बाधित है, खासकर हमीरपुर (49 योजनाएं), मंडी (56 योजनाएं) और शिमला (41 योजनाएं) में। इससे बड़ी आबादी को पीने के पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।

जिलेवार प्रभाव और जारी बचाव कार्य

जिलेवार आंकड़ों पर गौर करें तो मंडी (229 सड़कें अवरुद्ध) और कुल्लू (153 सड़कें अवरुद्ध) सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में हैं। शिमला (46 सड़कें), कांगड़ा (46 सड़कें), चंबा (21 सड़कें) और सोलन (16 सड़कें) जैसे अन्य जिले भी लगातार भूस्खलन और पहाड़ी दरकने की घटनाओं से जूझ रहे हैं।

एसडीएमए के अनुसार, बहाली का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और नए भूस्खलन के कारण कई इलाकों में सफाई अभियान में बाधा आ रही है।


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