उत्तर प्रदेश में निवेश का नया अध्याय: योगी सरकार ने औद्योगिक विकास को दी नई उड़ान
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश के ढांचे को और मजबूत बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित इन्वेस्ट यूपी शासी निकाय की पहली बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस बैठक में प्रदेश को निवेश के मानचित्र पर एक अग्रणी स्थान दिलाने के उद्देश्यों से कई अहम फैसले किए गए।
इन्वेस्ट यूपी का पुनर्गठन: विशेषज्ञता और निवेशक-केंद्रित दृष्टिकोण पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन्वेस्ट यूपी के पुनर्गठन प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए इसे एक अधिक कार्यकुशल, विशेषज्ञता-आधारित और निवेशक-केंद्रित संस्था के रूप में विकसित करने पर बल दिया। इसके तहत, देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्र मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली में सैटेलाइट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन ऑफिस स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही, टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्विस सेक्टर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेल गठित होंगे। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक प्रकोष्ठ के कार्यक्षेत्र को स्पष्ट, निवेशक-केंद्रित और परिणामोन्मुख बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पुनर्गठित संस्था ‘एकल निवेश सुविधा एजेंसी’ के रूप में प्रदेश में निवेश प्रक्रिया को अत्यंत सरल और पारदर्शी बनाएगी।
4,000 नई फैक्ट्रियों का स्थापना: औद्योगिक विकास की गति तेज
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में प्रदेश में लगभग 4,000 नई फैक्ट्रियों की स्थापना हुई है, जिससे प्रदेश में फैक्ट्रियों की कुल संख्या 27,000 तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म’ मंत्र के सफल क्रियान्वयन को इस उल्लेखनीय औद्योगिक प्रगति का श्रेय दिया।
‘सेफ इंडस्ट्री’ की अवधारणा और भूमि सुधार: निवेशकों को सुरक्षित माहौल
‘सेफ सिटी’ की तर्ज पर ‘सेफ इंडस्ट्री’ की परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने औद्योगिक क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। इसका उद्देश्य निवेशकों और उद्यमियों को एक सुरक्षित और निश्चिंत वातावरण प्रदान करना है। साथ ही, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में किसानों को उचित मुआवजा देने और सर्किल रेट की असमानताओं को समाप्त करने पर भी जोर दिया गया। अप्रयुक्त औद्योगिक भूखंडों को निर्धारित समय सीमा के बाद नए निवेशकों को आवंटित करने का निर्णय भी लिया गया।
‘निवेश मित्र पोर्टल 3.0’: डिजिटल क्रांति से निवेश प्रक्रिया को सरलीकरण
मुख्यमंत्री योगी ने ‘निवेश मित्र पोर्टल 3.0’ को जल्द लागू करने के निर्देश दिए, जो आवेदन, स्वीकृति और प्रोत्साहन की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाएगा। सिंगल साइन-ऑन, एआई चैटबॉट, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं के साथ, यह पोर्टल निवेशकों के अनुभव को और भी सहज बनाएगा।
विदेशी निवेश पर विशेष ध्यान: वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की ओर अग्रसर
फोकस कंट्री डेस्क के माध्यम से जापान, कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, रूस, ताइवान, सिंगापुर और खाड़ी देशों के निवेशकों से सक्रिय संवाद स्थापित किया जा रहा है। ‘चाइना+1’ रणनीति के तहत, 219 बहुराष्ट्रीय कंपनियां उत्तर प्रदेश में निवेश की प्रक्रिया के सक्रिय चरण में हैं। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि ये अवसर राज्य को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
फॉर्च्यून 1000 कंपनियों के लिए अकाउंट मैनेजर: व्यक्तिगत संपर्क पर जोर
फॉर्च्यून 1000 सूची की 814 कंपनियों को अकाउंट मैनेजर आवंटित किए गए हैं, और 50 नए एमओयू हस्ताक्षरित हो चुके हैं। 280 से अधिक कंपनियों के साथ संवाद जारी है। मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग को स्वीकृत परियोजनाओं की प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में औद्योगिक विकास, निवेश एवं निर्यात प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, नगर विकास मंत्री अरविंद शर्मा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी सहित शासन और इन्वेस्ट यूपी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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