Jeffrey Epstein Files 2026: पीएम मोदी का नाम लीक हुए ईमेल में, भारत सरकार ने दावों को बताया “बकवास” – जानिए पूरा सच
जनवरी 2026 के अंत में जारी हुई ‘जेफरी एपस्टीन फाइल्स’ (Jeffrey Epstein Files) के नए दस्तावेजों ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। इन दस्तावेजों में अमेरिकी राष्ट्रपतियों और हॉलीवुड सितारों के साथ-साथ एक चौंकाने वाला नाम सामने आया है-भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। एपस्टीन फाइल्स के एक लीक हुए ईमेल में दावा किया गया है कि पीएम मोदी ने 2017 की इजरायल यात्रा के लिए उनसे ‘सलाह’ ली थी।
इस पर भारत सरकार (MEA) ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इन दावों को “एक अपराधी की बकवास” (Trashy Ruminations) करार दिया है। क्या है उस ईमेल में और क्या है 2017 के उस दौरे का सच? पढ़िए हमारी विस्तृत रिपोर्ट।
1. आखिर उस लीक ईमेल में क्या लिखा है? (What does the Email say?)
जारी किए गए दस्तावेजों में से एक ईमेल ऐसा है जिसमें एपस्टीन ने अपने एक सहयोगी को डींगे हांकते हुए पीएम मोदी का जिक्र किया है।
- दावा: एपस्टीन ने ईमेल में लिखा कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई 2017 की अपनी ऐतिहासिक इजरायल यात्रा को लेकर उससे “सलाह ली थी” (Took Advice)।
- विवादित लाइन: एपस्टीन ने आगे लिखा कि पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति (उस समय डोनाल्ड ट्रम्प) को खुश करने के लिए “इजरायल में गाना गाया और डांस किया” और अंत में लिखा—“IT WORKED” (यह काम कर गया)।
- हकीकत: यह ईमेल सिर्फ एपस्टीन का दावा है। इसमें पीएम मोदी और एपस्टीन के बीच किसी मुलाकात, बातचीत या संपर्क का रत्ती भर भी सबूत नहीं है। यह सिर्फ एक तरफा संचार है जो एपस्टीन ने किसी तीसरे व्यक्ति को भेजा था।
2. भारत सरकार का करारा जवाब: “एक अपराधी की बकवास”
जैसे ही यह खबर सामने आई, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बिना देर किए इस पर अपनी सख्त प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया।
- MEA का बयान: “जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा एक ऐतिहासिक कूटनीतिक दौरा था, यह एक तथ्य है। लेकिन इसके अलावा ईमेल में जो कुछ भी लिखा है, वह एक दोषी अपराधी की बकवास (Trashy Ruminations) से ज्यादा कुछ नहीं है।”
- कड़ी निंदा: सरकार ने कहा कि ऐसे आधारहीन दावों को “पूरी अवमानना (Utmost Contempt) के साथ खारिज किया जाना चाहिए।” सरकार ने साफ किया कि एक अपराधी द्वारा अपनी अहमियत बढ़ाने के लिए लिखे गए झूठ पर ध्यान देना समय की बर्बादी है।
3. 2017 की इजरायल यात्रा का सच (The Context of 2017 Visit)
एपस्टीन के झूठ को समझने के लिए हमें 2017 के उस दौरे को याद करना होगा।
- ऐतिहासिक महत्व: नरेंद्र मोदी इजरायल जाने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। यह यात्रा भारत-इजरायल के राजनयिक संबंधों के 25 साल पूरे होने पर हुई थी।
- एजेंडा: इस दौरे में पीएम मोदी ने तत्कालीन इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की थी। चर्चा के मुख्य मुद्दे रक्षा (Defense), कृषि, जल संरक्षण और आतंकवाद विरोधी अभियान थे।
- नाच-गाने का सच: एपस्टीन ने लिखा कि पीएम मोदी ने “डांस किया और गाना गाया”। हकीकत यह है कि पीएम मोदी का भव्य स्वागत हुआ था और भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुई थीं, जैसा कि हर विदेशी दौरे पर होता है। एपस्टीन ने इसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया।
4. एपस्टीन की “नेम-ड्रॉपिंग” की आदत (The Pattern of Name-Dropping)
जांचकर्ताओं और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जेफरी एपस्टीन को “नेम-ड्रॉपिंग” (Name-Dropping) की बीमारी थी।
- वह अक्सर दुनिया के ताकतवर नेताओं (जैसे बिल गेट्स, बिल क्लिंटन, ट्रम्प) का नाम अपने ईमेल में लिखता था ताकि सामने वाले को लगे कि उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक है।
- विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बेहद हास्यास्पद है कि भारत जैसा विशाल देश अपने प्रधानमंत्री के कूटनीतिक दौरे के लिए किसी दागी फाइनेंसर से सलाह लेगा। यह एपस्टीन का अपनी ‘इमेज’ चमकाने का एक पैंतरा मात्र था।
संपादक की राय (Fact Check Opinion)
“एपस्टीन फाइल्स में पीएम मोदी के नाम का आना ‘ब्रेकिंग न्यूज’ तो है, लेकिन ‘सबूत’ नहीं। पाठकों को यह समझना होगा कि ‘फ्लाइट लॉग’ (जो यात्रा साबित करता है) और ‘ईमेल का दावा’ (जो सिर्फ गपशप हो सकता है) में जमीन-आसमान का फर्क है।
पीएम मोदी का नाम किसी विजिटर लिस्ट या फ्लाइट लॉग में नहीं है, बल्कि एपस्टीन द्वारा तीसरे व्यक्ति को भेजे गए ईमेल में है। एपस्टीन की आदत थी कि वह लोगों को प्रभावित करने के लिए झूठ बोलता था। भारत सरकार का इसे ‘बकवास’ कहना पूरी तरह तार्किक लगता है, क्योंकि एक संप्रभु राष्ट्र की विदेश नीति किसी बिचौलिये के कहने पर नहीं चलती।”
निष्कर्ष
जेफरी एपस्टीन के पापों का घड़ा तो उसकी मौत के साथ फूट गया था, लेकिन उससे निकले छींटे अब भी दुनिया भर में गिर रहे हैं। पीएम मोदी के संदर्भ में, यह स्पष्ट है कि यह एक अपराधी की कोरी कल्पना थी जिसे उसने अपनी साख बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया। भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। जैसे-जैसे इन 30 लाख दस्तावेजों की जांच आगे बढ़ेगी, कई और नाम सामने आ सकते हैं, लेकिन हर नाम का मतलब ‘अपराध’ नहीं होता, यह हमें याद रखना होगा।
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