श्रम कानूनों में ऐतिहासिक क्रांति: 29 को 4 में समेटकर, देश भर के करोड़ों श्रमिकों के लिए नया सवेरा
लंबी और गहन तैयारी के बाद, भारत ने अपने श्रम कानूनों के इतिहास में एक युगांतरकारी बदलाव देखा है। केंद्र सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को सुव्यवस्थित कर चार नए ‘लेबर कोड’ पेश किए हैं, जिनका प्रभाव देश के हर वर्ग के श्रमिक पर पड़ने वाला है। ये नए कोड, वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक संबंध और कार्यस्थल सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को एक साथ लेकर आए हैं।
असंगठित को मिला सहारा, गिग वर्कर भी अब सुरक्षित
सरकार का दावा है कि इन नए नियमों से असंगठित क्षेत्र, गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों सहित करोड़ों श्रमिकों को पहली बार औपचारिक सुरक्षा का कवच मिलेगा। नए लेबर कोड यह सुनिश्चित करते हैं कि चाहे नौकरी स्थायी हो, अस्थायी, फिक्स्ड-टर्म या फिर गिग वर्क, हर किसी को न्यूनतम वेतन का अधिकार प्राप्त होगा।
नियुक्ति पत्र का अधिकार, सामाजिक सुरक्षा का विस्तृत जाल
सरकार के अनुसार, अब हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा, जिससे रोजगार का रिकॉर्ड विधिवत दर्ज होगा। सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी अभूतपूर्व रूप से बढ़ाया गया है। EPF, ESI और इंश्योरेंस जैसी सुविधाएं अब केवल संगठित क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारियों तक पहुंचेंगी।
गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों के लिए विशेष फंड, आधार-लिंक्ड एकाउंट
गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों के लिए एक अलग सामाजिक सुरक्षा फंड का निर्माण किया जाएगा, जिसमें एग्रीगेटर कंपनियों को अपने टर्नओवर का 1 से 2 प्रतिशत योगदान देना होगा। सभी श्रमिकों के लिए एक आधार-लिंक्ड यूनिवर्सल अकाउंट नंबर की भी व्यवस्था की जा रही है, जिससे नौकरी बदलने पर भी लाभ प्राप्त करना सुगम हो जाएगा।
महिला श्रमिकों के लिए समानता और सुरक्षा, परिवार की नई परिभाषा
महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और समानता पर विशेष ध्यान दिया गया है। लैंगिक भेदभाव पर सख्त रोक है और महिलाओं को रात की शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों। शिकायत निवारण समितियों में महिला प्रतिनिधियों की उपस्थिति अब अनिवार्य है। एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि परिवार की परिभाषा में सास-ससुर को भी शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य जांच से लेकर कार्यस्थल दुर्घटनाओं तक, श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
श्रमिक सुरक्षा के तहत, 40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है। खतरनाक उद्योगों में सुरक्षा समितियों का गठन, सुरक्षात्मक उपकरणों का प्रावधान और राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करना आवश्यक होगा। विशेष बात यह है कि अब कई परिस्थितियों में सफर के दौरान होने वाली दुर्घटनाओं को भी कार्यस्थल दुर्घटना माना जाएगा।
फिक्स्ड-टर्म को ग्रेच्युटी, कॉन्ट्रैक्ट वर्करों को मुख्य नियोक्ता से लाभ
फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव यह है कि अब वे एक साल की सेवा पर ही ग्रेच्युटी के हकदार होंगे, जो पहले पांच साल थी। कॉन्ट्रैक्ट वर्करों को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा लाभ मुख्य नियोक्ता द्वारा प्रदान किए जाएंगे। ओवरटाइम नियमों को कड़ा किया गया है और इसके भुगतान को सामान्य वेतन का दोगुना करने का प्रावधान है।
वेतन भुगतान में तेजी, सवैतनिक अवकाश का सरलीकरण
वेतन भुगतान की समय-सीमा कम कर दी गई है और सवैतनिक अवकाश का अधिकार 180 दिन पूरे होने के बाद मिल जाएगा। बीड़ी, खनन, टेक्सटाइल और MSME जैसे कई उद्योगों में 8 से 12 घंटे की मानकीकृत शिफ्ट लागू की जाएंगी, जिससे काम में अनियमितता कम होगी।
नियोक्ताओं के लिए सरलीकरण, निरीक्षणों में परामर्श पर जोर
नियोक्ताओं के लिए भी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। अब कंपनियों को कई फॉर्म और अलग-अलग रजिस्ट्रेशनों की जगह केवल एक पंजीकरण, एक लाइसेंस और एक वार्षिक रिटर्न दाखिल करना होगा। सरकार का कहना है कि निरीक्षण अब दंड पर आधारित न होकर परामर्श आधारित होंगे, जहाँ अधिकारी मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज में भारी वृद्धि, “प्रो-वर्कर” युग की शुरुआत
सरकार के अनुसार, 2015 में 19% सामाजिक सुरक्षा कवरेज अब बढ़कर 64% से अधिक हो गया है। नए लेबर कोड देश में एक “प्रो-वर्कर, प्रो-वूमेन और प्रो-यूथ” श्रम व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
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