PM मोदी ने जारी की रामनाथ कोविंद की आत्मकथा, बोले- युवा उनके संघर्ष और सेवाभाव से बहुत कुछ सीख सकते हैं

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की जीवन यात्रा अब किताब के रूप में देश के सामने है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को उनकी आत्मकथा ‘Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles’ का विमोचन किया। इस मौके पर पीएम ने कोविंद के संघर्ष, सादगी और सेवाभाव को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया।

राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने की कहानी

रामनाथ कोविंद का जीवन गांव से देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की असाधारण कहानी है। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात के परौंख गांव से निकले कोविंद ने वकालत से सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और आगे चलकर राज्यसभा सदस्य, बिहार के राज्यपाल और भारत के राष्ट्रपति बने।

उनकी आत्मकथा में इसी सफर के अलग-अलग पड़ावों, संघर्षों और अनुभवों को उनके अपने नजरिए से सामने रखा गया है। किताब का उद्देश्य केवल राजनीतिक यात्रा बताना नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों को समझाना भी है, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया।

पीएम मोदी ने जमकर की तारीफ

किताब के विमोचन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविंद का समाज और राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने युवा पीढ़ी से उनकी आत्मकथा पढ़ने की अपील करते हुए कहा कि उनके जीवन और अनुभवों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी कोविंद ने खुद को विश्राम तक सीमित नहीं किया। वह ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम करते रहे हैं।

मुश्किलों ने बनाया मजबूत

रामनाथ कोविंद के जीवन में संघर्ष बचपन से ही रहा। प्रधानमंत्री ने उनकी आत्मकथा में वर्णित उस दर्दनाक घटना का जिक्र किया, जब बचपन में उनके घर में आग लगने से उनकी मां की मौत हो गई थी।

इतनी कम उम्र में मां को खोना किसी भी बच्चे के लिए बेहद कठिन अनुभव होता है। लेकिन कोविंद ने इस त्रासदी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। पीएम मोदी ने कहा कि मुश्किलों ने उन्हें तोड़ने के बजाय मजबूत बनाया।

युवाओं के लिए क्या है संदेश?

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो परेशानियों से हार न मानें और कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का हौसला रखें। कोविंद की कहानी इसी सोच का उदाहरण है।

उनका सफर यह दिखाता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के सहारे व्यक्ति बड़ी मंजिल हासिल कर सकता है।

‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़ी भूमिका

राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के बाद भी रामनाथ कोविंद सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह दूर नहीं हुए। केंद्र सरकार ने 2023 में उन्हें ‘एक देश, एक चुनाव’ पर बनी उच्चस्तरीय समिति का अध्यक्ष बनाया था। समिति ने मार्च 2024 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी।

पीएम मोदी ने उनके इसी सक्रिय सार्वजनिक योगदान को कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव का उदाहरण बताया।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

रामनाथ कोविंद की आत्मकथा केवल एक पूर्व राष्ट्रपति की कहानी नहीं है। यह उस व्यक्ति की यात्रा है, जिसने सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का सफर तय किया।

कानपुर देहात के गांव से राष्ट्रपति भवन तक पहुंची यह कहानी युवाओं को एक सीधा संदेश देती है—हालात चाहे कितने भी कठिन हों, मेहनत, धैर्य और संकल्प इंसान को अपनी मंजिल तक पहुंचा सकते हैं।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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