जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति को लेकर दिल्ली में कानूनी बहस तेज हो गई है। इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने तीन मांगों को लेकर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थानों की पहचान की गई है। वहीं, याचिकाकर्ता ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर रोक लगाने के नियमों और अनुमति प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर विवाद

दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति का मामला अब हाईकोर्ट में पहुंच गया है। इंडियन यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने के दिल्ली पुलिस के फैसले को चुनौती दी है।

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के आधार पर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, अदालत के निर्देश के बाद प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थानों की पहचान की गई है।

हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मामले में कुछ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे भी हैं, जिन पर हाईकोर्ट को सुनवाई करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश में क्या कहा गया था?

9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों के रद्द होने से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई थी।

दिए गए विवरण के अनुसार, अदालत ने कहा था कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से प्रदर्शन करने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। इसके लिए ऐसी वैकल्पिक जगहों की पहचान करने पर जोर दिया गया था, जहां प्रदर्शनकारी जरूरी सुविधाओं के साथ अपना विरोध दर्ज करा सकें।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसने इसी निर्देश के तहत तीन वैकल्पिक स्थानों की पहचान की है। हालांकि, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले की वैधता और उसके प्रभाव पर हाईकोर्ट में अलग से बहस हो रही है।

पुलिस ने कहा- याचिका का अब कोई मतलब नहीं

दिल्ली हाईकोर्ट में पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने जस्टिस अमित महाजन की अदालत में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत प्रदर्शन के लिए दूसरी जगहों की पहचान की जा चुकी है।

पुलिस का तर्क था कि जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया जा चुका है, तो इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका अब निष्प्रभावी हो गई है।

दूसरी ओर, उदय भानु चिब की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने इस दलील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि याचिका में कई अन्य मांगें भी शामिल हैं, जिन पर अदालत का विचार करना जरूरी है।

2022 के स्थायी आदेश पर भी उठे सवाल

उदय भानु चिब की याचिका में दिल्ली पुलिस के 2022 के स्थायी आदेश को भी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस आदेश का इस्तेमाल शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को रोकने के लिए मनमाने या जरूरत से ज्यादा सख्त तरीके से नहीं किया जाना चाहिए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस को प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर फैसला लेना चाहिए। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगाने के बजाय कम प्रतिबंधात्मक विकल्पों पर भी विचार किया जाना चाहिए।

इस मुद्दे में एक तरफ सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की पुलिस की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार का सवाल भी शामिल है।

10 दिन पहले आवेदन देने की शर्त को चुनौती

याचिका में प्रदर्शन की अनुमति के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देने की शर्त पर भी सवाल उठाया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि इस समय-सीमा को इतना कठोर नियम नहीं बनाया जाना चाहिए कि कम समय पहले दिए गए हर आवेदन को स्वतः खारिज कर दिया जाए। उनके मुताबिक, पुलिस को आवेदन मिलने के समय के साथ-साथ मामले की परिस्थितियों और प्रदर्शन की प्रकृति पर भी विचार करना चाहिए।

इस मांग का उद्देश्य प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े फैसलों में अधिक लचीलापन और परिस्थितियों के अनुरूप निर्णय सुनिश्चित करना बताया गया है।

हाईकोर्ट ने तीन मांगों पर दिल्ली पुलिस को नोटिस दिया

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उदय भानु चिब की याचिका में शामिल तीन मांगों पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा। पुलिस ने नोटिस जारी करने का विरोध किया था, लेकिन अदालत ने इन मुद्दों पर जवाब लेने का फैसला किया।

अब आगे की सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत प्रदर्शन स्थलों के निर्धारण, अनुमति प्रक्रिया और 10 दिन पहले आवेदन देने की शर्त को लेकर क्या रुख अपनाती है। इस मामले का असर भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति से जुड़े नियमों की व्याख्या पर भी पड़ सकता है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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