जयपुर. नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने पीएम मोदी से मांग की है कि वह राज्य की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का तुरंत संज्ञान लें और गैरजिम्मेदार मंत्रियों को कड़ा संदेश दें.
आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनवाल ने एक्स के माध्यम से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, मैं आपका ध्यान राजस्थान राज्य की बेहद चिंताजनक और खराब सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की ओर आकर्षित करना चाहता हूं. वर्तमान में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग “वेंटिलेटर पर” है, आम जनता को बुनियादी इलाज भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के बजाय अपने निजी कारोबार को बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. इसके अलावा, सरकारी अस्पतालों में लैब टेस्टिंग का काम एक निजी डायग्नोस्टिक कंपनी को सौंपा गया है, जो कथित तौर पर स्वास्थ्य मंत्री के करीबी व्यक्ति से जुड़ी है। सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कई गंभीर जांचें निजी लैब द्वारा की जा रही हैं। अनियमितताएं सामने आ रही हैं, नमूनों की जांच किए बिना रिपोर्ट जारी की जा रही हैं, स्वस्थ लोगों को थायरॉइड और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित बताया जा रहा है और आए दिन अखबारों में इन घटनाओं से जुड़ी खबरें छप रही हैं. यह सिर्फ लापरवाही नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है, जो आपराधिक श्रेणी में आता है.
भजनलाल शर्मा से सवाल
प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सवाल है कि आखिर इस निजी लैब को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है? गलत रिपोर्ट से जिन मरीजों की जान खतरे में पड़ जाएगी, उसका जिम्मेदार कौन होगा? यह सिर्फ जांच का मामला नहीं बल्कि आपराधिक लापरवाही का मामला है और राजस्थान की जनता सरकार से जवाब मांग रही है. जिस स्वास्थ्य मंत्री से पूरा राजस्थान उम्मीद करता है, उन्हीं के गृह जिले नागौर की स्वास्थ्य सेवाएं भी बेहद दयनीय स्थिति में हैं. डॉक्टरों की कमी, टूटी-बंद मशीनें और व्यापक अव्यवस्था बताती है कि वर्तमान समय में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति काफी कमजोर है. सरकारी अस्पतालों की हालत देखकर मैं कहना चाहता हूं कि राजस्थान को ऐसे अक्षम और गैर-जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री की जरूरत नहीं है, जिसे अपने विभाग की जमीनी स्तर की कोई जानकारी तक नहीं है।
प्रधानमंत्री को इस स्थिति का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और गैरजिम्मेदार मंत्रियों को कड़ा संदेश देना चाहिए।
डोटासरा ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस स्थिति पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और गैरजिम्मेदार मंत्रियों को कड़ा संदेश देना चाहिए ताकि राजस्थान में स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग को संभालने वाले को कड़ा सबक मिले और जनता को सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर लाभ मिल सके. सरकार द्वारा लैब से संबंधित कार्य निजी कंपनी को दिये जाने से वर्षों से कम वेतन पर काम कर रहे संविदा कर्मियों/प्लेसमेंट कर्मियों की आजीविका भी खतरे में पड़ गयी है. मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से फिर कहना चाहता हूं कि जब आपने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में टेस्टिंग का काम प्राइवेट लैब को दिया तो पिछले दस दिनों में क्या स्थिति थी? इसकी उच्च स्तरीय समीक्षा होनी चाहिए क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अपनी जवाबदेही के प्रति लापरवाह हैं और उनके पास इस विभाग से जुड़ी कोई जमीनी जानकारी भी नहीं है.
पीसी: दहॉक
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