‘सेवा तीर्थ’ के रूप में नव-परिभाषित पीएमओ: सत्ता से सेवा की ओर एक सांस्कृतिक परिवर्तन
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का नामकरण ‘सेवा तीर्थ’ के रूप में किया गया है, जो मोदी सरकार के शासन के प्रति एक गहरे बदलाव का प्रतीक है। सूत्रों के अनुसार, सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के अंतिम चरण में ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ के नाम से जाना जाने वाला यह परिसर, अब राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को मूर्त रूप देने और सेवा की भावना को प्रतिबिंबित करने के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत करेगा। इस बहुउद्देशीय परिसर में कैबिनेट सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय, और ‘इंडिया हाउस’ के कार्यालय भी शामिल होंगे, जो उच्च-स्तरीय वार्ताओं का गवाह बनेगा।
यह नामकरण केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और नैतिक क्रांति का संकेत है। अधिकारियों का मानना है कि भारत की सार्वजनिक संस्थाएं ‘शक्ति’ से ‘सेवा’ और अधिकार से जवाबदेही की ओर एक मौन लेकिन गहन परिवर्तन से गुजर रही हैं।
इस परिवर्तन की गूंज अन्य सरकारी प्रतिष्ठानों में भी सुनाई दे रही है। राज्यों के राज्यपालों के आधिकारिक आवास, राजभवनों का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ किया जा रहा है, जो कल्याणकारी शासन के लोकाचार को दर्शाता है। प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास, लोक कल्याण मार्ग (2016 से नामकरण), भी इसी सिद्धांत का प्रतीक है, जो विशिष्टता के बजाय व्यापक कल्याण का प्रतिनिधित्व करता है।
केंद्रीय सचिवालय का नाम ‘कर्तव्य भवन’ रखना इस विचार को और पुष्ट करता है कि जनसेवा एक पवित्र प्रतिबद्धता है। इसी तरह, राजपथ का ‘कर्तव्य पथ’ में रूपांतरण इस संदेश को सशक्त करता है कि सत्ता कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है। यह व्यापक नामकरण मोदी सरकार के ‘कर्तव्य’ और पारदर्शिता पर आधारित शासन के नए दृष्टिकोण को उजागर करता है।
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