तो लीजिए, इस आर्टिकल का एक नया और आकर्षक रूप:
बात अब विज्ञान भवन की नहीं, भारत मंडपम की है…
सोचिए ज़रा! वह दौर जब कॉर्पोरेट की नौकरी छोड़ने पर घर में ‘सर्वनाश’ की आशंका थी, आज उस नज़ारे से हम कहाँ आ गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में राष्ट्रीय स्टार्टअप दिवस पर कहा कि अब हम वहाँ से निकल चुके हैं जहाँ लोग असफलता का डर दिखाते थे, और आज हम पूरे उत्साह के साथ इस भविष्य का जश्न मना रहे हैं।
बेटी और ‘सर्वनाश’ वाला किस्सा
पीएम मोदी ने स्टार्टअप के पुराने दिनों का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने याद किया कि कैसे एक बेटी ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ी और घर जाकर माँ को बताया कि वह स्टार्टअप करना चाहती है। सुनकर माँ का जवाब था— "सर्वनाश!" उस वक्त लोग इसे बर्बादी की राह समझते थे। लेकिन आज वही नज़रिया बदल गया है। पहले जहाँ विज्ञान भवन की सभाओं में 500-700 लोग आते थे, आज भारत मंडपम में स्थान कम पड़ जाता है।
आँकड़े जो कहती हैं विकास की कहानी
पीएम मोदी ने कहा कि यह महज़ एक सरकारी योजना की सफलता नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों का साकार होना है। एक दशक पहले देश में 500 से भी कम स्टार्टअप थे, और संभावनाएँ बहुत सीमित थीं। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। आँकड़े गवाह हैं: 2014 में जहाँ सिर्फ 4 यूनिकॉर्न थे, आज यह आंकड़ा सवा सौ के करीब पहुँच गया है। देश में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप और 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न ने भारत को ‘स्टार्टअप हब’ बना दिया है।
आप ही तो हैं नए भारत के ‘ब्राइट केस स्टडी’
पीएम मोदी ने इनोवेटर्स को नए भारत का वाहक बताया। उनके अनुसार, युवा अब ‘प्रॉब्लम सॉल्विंग’ पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "आने वाले समय में जब भारत की ग्रोथ स्टोरी लिखी जाएगी, तो आज यहाँ बैठे लाखों युवा खुद एक चमकती हुई केस स्टडी होंगे।" यह सफलता सिर्फ सुनहरे भविष्य का संकेत ही नहीं, बल्कि उस सोच में आई क्रांति है जहाँ असफलता का नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का साहस का सम्मान हो रहा है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
