भारतीय उद्योग जगत के लिए चुनौतियां अब केवल 50 प्रतिशत टैरिफ तक सीमित नहीं रह गई हैं। अतिरिक्त शुल्कों का भारी बोझ अंतिम ‘डिलिवर ड्यूटी पेड’ (DDP) कीमत को इतना बढ़ा देता है कि अमेरिकी बाजारों में भारतीय सामान की चमक फीकी पड़ने लगी है। आलम यह है कि चीन और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देश करीब 30 प्रतिशत कम लागत पर अपने उत्पाद बेच रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ कमजोर होती जा रही है।
संकट के बादल तब और गहरे हो गए जब डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत का ‘महा-टैरिफ’ लगाने की चर्चाएं तेज हुईं। धनबालन ने आगाह किया कि जहाँ वर्तमान में 50 प्रतिशत का भार ही असहनीय है, वहाँ 500 प्रतिशत की मार की कल्पना करना भी डरावना है। अगर यह फैसला हकीकत बना, तो अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात पूरी तरह धराशायी हो सकता है, जिससे देश में बेरोजगारी का एक बड़ा संकट खड़ा होने की आशंका है।
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