‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगाँठ पर राष्ट्रव्यापी उत्सव, दलहन में आत्मनिर्भरता का नया अध्याय
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। देश के गौरवशाली अतीत का अभिन्न अंग, राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रव्यापी समारोहों का आयोजन किया जाएगा। यह घोषणा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट ब्रीफिंग के दौरान की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम’ की अमूल्य भूमिका को देखते हुए, इस मील के पत्थर को धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया गया है। इन समारोहों का मुख्य उद्देश्य देश भर के युवाओं और छात्रों को, जो शायद इतिहास की इस महत्वपूर्ण कड़ी से अनभिज्ञ हों, उन्हें जोड़ना है।
‘वंदे मातरम’: देशभक्ति का वो अमर गान
बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा संस्कृत में रचित ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता की लड़ाई में लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा का अथाह स्रोत था। ‘इंडिया डॉट जीओवी’ पोर्टल के अनुसार, इस गान को राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के समान ही महत्वपूर्ण दर्जा प्राप्त है।
दलहन में आत्मनिर्भरता की ओर भारत का मजबूत कदम
‘वंदे मातरम’ के उत्सव के साथ-साथ, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन’ को भी हरी झंडी दे दी है। यह एक दूरगामी और ऐतिहासिक पहल है, जिसका लक्ष्य देश को दलहन उत्पादन में पूर्णतः आत्मनिर्भर बनाना है। यह मिशन 2025-26 से 2030-31 तक, यानी छह वर्षों की अवधि में, 11,440 करोड़ रुपये के भारी-भरकम वित्तीय परिव्यय के साथ क्रियान्वित किया जाएगा।
बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता: एक चुनौती
भारत की कृषि प्रणाली और आहार में दलहन का विशेष महत्व है। हम न केवल दलहन के सबसे बड़े उत्पादक हैं, बल्कि दुनिया में सबसे बड़े उपभोक्ता भी हैं। बढ़ती आय और जीवन स्तर के साथ, दलहन की मांग में भी लगातार इजाफा हो रहा है। हालांकि, दुखद बात यह है कि घरेलू उत्पादन इस बढ़ती मांग को पूरा करने में सक्षम नहीं रहा है, जिसके परिणामस्वरूप दलहन के आयात में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मिशन की व्यापक रणनीति
इस आयात पर निर्भरता को कम करने, बढ़ती मांग को पूरा करने, उत्पादन को अधिकतम करने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से, वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में इस 6-वर्षीय ‘दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन’ की घोषणा की गई थी। यह मिशन अनुसंधान, उन्नत बीज प्रणालियों के विकास, खेती के क्षेत्र के विस्तार, प्रभावी खरीद तंत्र और मूल्य स्थिरता जैसी रणनीतियों को अपनाकर एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करेगा।
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