वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर सख्त चेतावनी: फर्जी नाम मिला तो सीधे नपेंगे जिला निर्वाचन अधिकारी

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वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर DEO की खैर नहीं: फर्जी नाम मिला तो सीधे नपेंगे जिला निर्वाचन अधिकारी
New Delhi, Feb 18 (ANI): (File Photo) Election Commissioner Gyanesh Kumar appointed as the Chief Election Commissioner of India with effect from 19.02.25, in New Delhi on Tuesday. (ANI Photo)

वोटर लिस्ट पर आयोग का ‘हंटर’: अब अधिकारियों की सीधी जवाबदेही, गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं

Bengal SIR: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर चुनाव आयोग ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है. इस बार सीधा निशाना जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीइओ) यानी जिलाधिकारियों पर है. आयोग का फरमान स्पष्ट है: वोटर लिस्ट में एक भी फर्जी नाम नहीं जुड़ना चाहिए और न ही किसी असली मतदाता का नाम कटना चाहिए. पूरी प्रक्रिया को वर्ष 2002 की मतदाता सूची की लिंकिंग के आधार पर परखा जाएगा. आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि कहीं भी त्रुटि मिली, तो उसे सीधे तौर पर डीइओ की निगरानी में बड़ी लापरवाही माना जाएगा और कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

सावधान! आ रहे हैं 4 रोल ऑब्जर्वर, होगी बारीकी से जांच

बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीइओ) ने सभी डीइओ को पत्र भेजकर सतर्क कर दिया है कि चुनाव आयोग चार विशेष रोल ऑब्जर्वर तैनात कर रहा है. ये ऑब्जर्वर न केवल सीइओ कार्यालय में बैठकर फाइलों की जांच करेंगे, बल्कि अचानक जिलों का दौरा कर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की हकीकत भी परखेंगे. यदि उनकी जांच में कोई गंभीर खामी मिली, तो डीइओ की जवाबदेही तय होगी. इसी दबाव को देखते हुए अब हर जिले में विशेष टीमें गठित की जा रही हैं, जो गणना फॉर्म और मतदाता विवरणों का दोबारा मिलान करने में जुट गई हैं.

लापरवाही पर नाराजगी: बीएलओ से डीइओ तक सब रडार पर

लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी और अनमैप्ड मतदाताओं के कारण उपजे राजनीतिक विवादों पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल प्रशासन के एक वर्ग और राजनीतिक रूप से प्रभावित कुछ बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ), इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (इआरओ) व अतिरिक्त इआरओ की ढिलाई से कार्य की सुचिता प्रभावित हुई है. आयोग का मानना है कि निगरानी की कमी के कारण यह स्थिति बनी है, जिसके बाद अब बीएलओ से लेकर शीर्ष अधिकारियों तक की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया गया है.

अवेयर मीडिया नेटवर्क

डिजिटल सत्यापन: घर-घर जाएंगे अधिकारी, एप से होगी मॉनिटरिंग

डीइओ पर शिकंजा कसने के साथ ही बीएलओ को एप के माध्यम से नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं. निर्देश है कि 2002 की एसआइआर सूची में नाम होने के बावजूद जो मतदाता अभी तक मैप नहीं हो पाए हैं, उनका डेटा दोबारा एकत्र कर सत्यापित किया जाए. यदि मामला केवल तकनीकी त्रुटि का है, तो मतदाता को दफ्तर बुलाने के बजाय बीएलओ खुद उनके घर जाकर दस्तावेजों की जांच करेंगे और जानकारी अपडेट करेंगे. हालांकि, आयोग ने सख्त हिदायत दी है कि ‘प्रोजेनी मैपिंग’ (वंशानुगत मिलान) से जुड़े हर मामले में मतदाताओं को सुनवाई के लिए अनिवार्य रूप से उपस्थित होना होगा.

 

 


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