पेट के निचले बाईं ओर दर्द: कहीं यह डाइवर्टिकुलाइटिस तो नहीं? जानें लक्षण और बचाव
पेट के निचले बाईं ओर होने वाले दर्द को अक्सर हम गैस, कब्ज या मांसपेशियों में खिंचाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है। अगर यह दर्द लगातार बना रहे और इसके साथ बुखार, मतली या दस्त जैसे लक्षण दिखें, तो यह ‘डाइवर्टिकुलाइटिस’ का गंभीर संकेत हो सकता है। यह स्थिति बड़ी आंत की दीवार में बनी नन्हीं थैलियों में सूजन या संक्रमण के कारण पैदा होती है, जिसका समय पर उपचार बेहद जरूरी है।
पेट के निचले बाईं ओर दर्द के संभावित कारण
इस हिस्से में दर्द के पीछे कई सामान्य और गंभीर वजहें हो सकती हैं:
• कब्ज और मांसपेशियों में खिंचाव
• डाइवर्टिकुलाइटिस
• किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी)
• इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS)
• आंतों में संक्रमण
• महिलाओं में ओवेरियन सिस्ट या एंडोमेट्रियोसिस
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कैसे पहचानें डाइवर्टिकुलाइटिस को?
डाइवर्टिकुलाइटिस की समस्या तब जन्म लेती है जब बड़ी आंत की थैलियों (Diverticula) में सूजन या इन्फेक्शन हो जाता है। यह अक्सर ‘सिग्मॉइड कोलन’ को प्रभावित करता है, जो पेट के बाईं ओर स्थित होता है। यही वजह है कि इसका दर्द विशेष रूप से इसी हिस्से में महसूस होता है। यदि दर्द प्रभावित हिस्से को दबाने पर बढ़ जाए और साथ में बुखार महसूस हो, तो यह डाइवर्टिकुलाइटिस का पुख्ता संकेत हो सकता है।
फर्क समझें: डाइवर्टिकुलाइटिस, IBS और किडनी स्टोन
इन तीनों समस्याओं के लक्षण कभी-कभी एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन इनमें बारीक अंतर होता है:
डाइवर्टिकुलाइटिस: इसमें पेट के बाईं ओर एक ही जगह पर लगातार दर्द बना रहता है। साथ ही बुखार, कब्ज, दस्त और पेट में सूजन की समस्या हो सकती है।
IBS (इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम): इसमें दर्द रुक-रुक कर होता है। पेट फूलना और गैस की शिकायत रहती है, लेकिन मल त्याग के बाद दर्द में अक्सर राहत मिल जाती है।
किडनी स्टोन: इसका दर्द लहरों (Wavy pain) की तरह अचानक और बहुत तेज होता है, जो कमर से शुरू होकर पेट की तरफ आता है। पेशाब में खून या जलन इसके प्रमुख लक्षण हैं।
कौन हैं खतरे की रडार पर?
डाइवर्टिकुलाइटिस का जोखिम इन स्थितियों में बढ़ जाता है:
• 50 वर्ष या उससे अधिक की आयु
• आहार में फाइबर की कमी
• धूम्रपान और मोटापा
• शारीरिक सक्रियता का अभाव
• लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं (NSAIDs) का सेवन
• परिवार में डाइवर्टिकुलर डिजीज का इतिहास
दिलचस्प बात यह है कि जिसे कभी बुजुर्गों की बीमारी माना जाता था, वह अब खराब जीवनशैली के कारण युवाओं में भी तेजी से देखी जा रही है।
उपचार और सावधानी
हल्के लक्षणों में डॉक्टर आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और कुछ समय के लिए ‘लो-फाइबर डाइट’ की सलाह देते हैं। हालांकि, संक्रमण गंभीर होने पर (जैसे आंत में छेद या फोड़ा बनना) मरीज को अस्पताल में भर्ती करने या सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। याद रखें, बिना डॉक्टरी परामर्श के कोई भी दर्द निवारक या एंटीबायोटिक दवा न लें।
निष्कर्ष: पेट के बाएं निचले हिस्से का हर दर्द सामान्य गैस नहीं होता। यदि दर्द के साथ मतली, बुखार या मल त्याग में बदलाव दिखे, तो यह डाइवर्टिकुलाइटिस, IBS या किडनी स्टोन हो सकता है। सटीक पहचान और सही इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर से जांच जरूर कराएं।
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