गणाधिप संकष्टी चतुर्थी: विघ्नहर्ता गणेश का आशीष और शिव आराधना का शुभ दिन
मार्गशीर्ष मास का आगमन अपने साथ धार्मिक महत्व के कई अवसर लेकर आया है। इसी क्रम में, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि विशेष रूप से मनाई जाती है, जो ‘गणाधिप संकष्टी चतुर्थी’ के नाम से जानी जाती है। यह पवित्र दिन प्रथम पूज्य भगवान गणेश के ‘गणाधिप’ स्वरूप की आराधना के लिए समर्पित है। इस वर्ष, 8 नवंबर, शनिवार को, यह शुभ चतुर्थी मनाई जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत और विधिवत पूजा करने से जीवन के समस्त संकटों का निवारण होता है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस विशेष दिन पर, भगवान शिव के नामों का जप करना भी अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है। भगवान शिव के 108 कल्याणकारी नामों का स्मरण, जैसे कि ॐ महाकाल नमः, ॐ रुद्रनाथ नमः, ॐ भीमशंकर नमः, ॐ नटराज नमः, ॐ चंद्रमोली नमः, ॐ नीलकंठ नमः, ॐ महाकालेश्वर नमः, ॐ त्रिपुरारी नमः, ॐ त्रिलोकनाथ नमः, ॐ त्रिनेत्रधारी नमः, ॐ अमरनाथ नमः, ॐ केदारनाथ नमः, ॐ अर्धनारीश्वर नमः, ॐ मृत्युन्जन नमः, ॐ रामेश्वर नमः, ॐ सोमनाथ नमः, ॐ महेश्वर नमः, ॐ पशुपति नमः, ॐ अनादी नमः, ॐ शिवम् नमः, ॐ महादेव नमः, ॐ नटेषर नमः, ॐ भूतेश्वर नमः, ॐ नागेश्वर नमः, और अन्य 108 नामों का जाप, भक्तों को अलौकिक शांति और आशीर्वाद प्रदान करता है।
यह गणाधिप संकष्टी चतुर्थी, भगवान गणेश के आशीर्वाद और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक अनमोल अवसर है। भक्त इस दिन को भक्तिभाव से मनाकर अपने जीवन को मंगलमय बना सकते हैं।
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