हनुमान जन्मोत्सव 2024: संकटमोचन की कृपा पाने के लिए ऐसे करें ‘सुंदरकांड’ का पाठ, जीवन में बरसेगी खुशहाली
आज यानी 02 अप्रैल को देशभर में पवनपुत्र हनुमान का जन्मोत्सव बड़े ही श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कलयुग के जागृत देवता और 8 अमर चिरंजीवियों में शुमार बजरंगबली की आराधना का हिंदू धर्म में अटूट महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को ही अंजनी पुत्र हनुमान का अवतरण हुआ था। माना जाता है कि इस पावन अवसर पर विधि-विधान से पूजा और विशेष रूप से ‘सुंदरकांड’ का पाठ करने से साधक की हर मनोकामना पूर्ण होती है। हनुमान जी की असीम कृपा से न केवल धन और ऐश्वर्य, बल्कि बल और बुद्धि की भी प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि इस खास दिन सुंदरकांड का पाठ किस प्रकार करना फलदायी होता है।
महिमा अपार: आखिर क्या है सुंदरकांड?
रामचरितमानस का सबसे ऊर्जावान पांचवां अध्याय ‘सुंदरकांड’ है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास जी ने 16वीं शताब्दी में की थी। यह रामचरितमानस का एकमात्र ऐसा सोपान है, जो पूरी तरह से हनुमान जी के पराक्रम और उनकी विजय गाथा को समर्पित है। इसमें माता सीता की खोज, सुरसा जैसी राक्षसी पर विजय, लंका में प्रवेश, अशोक वाटिका का विध्वंस और स्वर्ण लंका के दहन जैसे रोमांचक प्रसंग मिलते हैं। सुंदरकांड की प्रत्येक चौपाई आध्यात्मिक रूप से बेहद शक्तिशाली है, यही कारण है कि इसे एक प्रमुख ‘योग शास्त्र’ के रूप में भी देखा जाता है।
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हनुमान जन्मोत्सव पर क्यों जरूरी है सुंदरकांड का पाठ?
हनुमान जयंती के अवसर पर सुंदरकांड का पाठ करना साक्षात दिव्य शक्तियों को जागृत करने जैसा है। इस दिन इसका पाठ करने से मिलने वाला पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। यह पाठ न केवल हमारे भीतर के नकारात्मक विचारों और पापों का नाश करता है, बल्कि शरीर के सूक्ष्म ऊर्जा केंद्रों, विशेषकर कंठ और हृदय चक्र को सक्रिय करने में भी सहायक होता है। सुंदरकांड का नियमित पाठ मानसिक तनाव को दूर कर आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग प्रशस्त करता है।
सुंदरकांड पाठ की सही विधि और नियम
सुंदरकांड का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए इसे सही विधि से करना अनिवार्य है:
1. सुंदरकांड का पाठ हमेशा ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) या फिर शाम को 4 बजे के बाद करना सबसे उत्तम माना जाता है।
2. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोपहर 12 बजे के बाद इसका पाठ करना शुभ नहीं माना जाता, इससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
3. पाठ प्रारंभ करने से पहले एक साफ चौकी पर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
4. इसके बाद भगवान श्रीराम और हनुमान जी का श्रद्धापूर्वक ध्यान करें और फिर पाठ शुरू करें।
5. याद रखें, पाठ को कभी भी बीच में अधूरा न छोड़ें और पाठ के दौरान किसी बाहरी व्यक्ति से बात न करें।
6. पाठ करते समय अपने मन में पूरी तरह सकारात्मकता और भक्ति भाव बनाए रखें।
7. पाठ संपन्न होने के बाद बजरंगबली को ताजे फल, फूल और विशेष रूप से बेसन या बूंदी के लड्डुओं का भोग लगाएं।
8. अंत में हनुमान जी की आरती पूरी श्रद्धा के साथ करें और फिर प्रसाद को सभी में वितरित करें।
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