कामाख्या मंदिर में हर इच्छा होगी पूरी, बस दर्शन के दौरान जपना न भूलें यह दिव्य मंत्र!

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- News Desk
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every wish fulfilled at kamakhya temple not forget to chant this divine mantra during visit

नील पर्वत पर विराजी हैं माँ कामाख्या: जहाँ पूरी होती है हर अधूरी मुराद!

असम के गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत की चोटियों पर स्थित कामाख्या मंदिर केवल एक तीर्थ ही नहीं, बल्कि आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम है। 51 शक्तिपीठों में सर्वोच्च स्थान रखने वाला यह मंदिर अपनी अद्वितीय शक्तियों के लिए विश्व विख्यात है। माना जाता है कि यहाँ माँ के चरणों में शीश नवाने वाले किसी भी भक्त की झोली खाली नहीं रहती। यदि आप भी इस पावन धाम की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह लेख आपको माँ कामाख्या की महिमा, उनके इतिहास और विशेष मंत्रों से अवगत कराएगा।

आस्था का केंद्र: मंदिर का पौराणिक महत्व

पौराणिक गाथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव अपनी पत्नी माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर वियोग में ब्रह्मांड का भ्रमण कर रहे थे, तब सृष्टि को बचाने के लिए श्रीहरि विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 खंड कर दिए थे। मान्यता है कि इसी नील पर्वत पर देवी का ‘योनि भाग’ गिरा था। यही कारण है कि कामाख्या मंदिर को पूरी दुनिया में ‘शक्ति’ और ‘सृजन’ के सबसे बड़े केंद्र के रूप में पूजा जाता है।

सदियों पुराना इतिहास: कामदेव से नरकासुर तक

लोक कथाओं के अनुसार, इस दिव्य मंदिर का निर्माण स्वयं कामदेव ने भगवान विश्वकर्मा की सहायता से किया था। प्राचीन काल में यह मंदिर आज की तुलना में कहीं अधिक विशाल और वास्तुकला का बेजोड़ नमूना हुआ करता था। इतिहास के पन्ने बताते हैं कि कामाख्या मंदिर का अस्तित्व आर्यों के आगमन से भी पुराना है। समय के साथ शैव संप्रदाय के प्रभाव और राजा नरकासुर के शासनकाल में इस मंदिर की भव्यता पुनः स्थापित हुई। हालांकि, 16वीं शताब्दी से पहले का इसका लिखित इतिहास आज भी रहस्यों के घेरे में है।

अनोखी परंपराएं: जहाँ मूर्ति नहीं, शक्ति की पूजा होती है

कामाख्या मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं के कारण अन्य मंदिरों से बिल्कुल अलग है। यहाँ मंदिर के गर्भगृह में देवी की कोई प्रतिमा नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक ‘योनिकुंड’ है, जिससे निरंतर जलधारा प्रवाहित होती रहती है। श्रद्धालु इसी जलधारा को माँ का साक्षात स्वरूप मानकर पूजते हैं। यह स्थान तंत्र साधना का सबसे प्रमुख केंद्र भी है। मुख्य मंदिर के घेरे में देवी माँ के दस अन्य स्वरूपों यानी ‘दस महाविद्याओं’ के भी अलग-अलग मंदिर स्थित हैं।

इन सिद्ध मंत्रों का करें जाप

माँ कामाख्या की कृपा प्राप्त करने के लिए दर्शन के दौरान इन मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है:

ॐ क्लीं क्लीं कामाख्या क्लीं क्लीं नमः

ॐ कामाख्ये कामकलायै कामेश्वरि नमोऽस्तुते। कामदायिनि सिद्धे त्वं कामरूपे नमो नमः॥

कामाख्ये वरदे देवी नीलपर्वतवासिनि। त्वं देवी जगतां माता योनिमुद्रे नमोऽस्तुते॥


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