मोक्षदा एकादशी 2025: पुण्य और मोक्ष का पावन पर्व, जानें पूजा विधि और महत्व
Religion Spirituality
oi-Ankur Sharma
Updated: Monday, December 1, 2025, 8:52 [IST]
मोक्षदा एकादशी 2025: हिन्दू धर्म में मोक्षदा एकादशी का विशेष स्थान है, इसे अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है। मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी पर पड़ने वाला यह पावन पर्व न केवल व्रत करने वाले को अपार पुण्य प्रदान करता है, बल्कि उसके पूर्वजों को भी मोक्ष की राह दिखाता है।
यही कारण है कि इस एकादशी को गीता जयंती के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन को भगवत गीता का दिव्य उपदेश दिया था। इस व्रत का विधिवत पालन करने से ही शुभ फलों की प्राप्ति संभव है।
मोक्षदा एकादशी 2025 की पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें।
- शुभ वस्त्र धारण: स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र पहनें।
- संकल्प: मन में भगवान विष्णु की कृपा और पूर्वजों की मुक्ति हेतु मोक्षदा एकादशी का व्रत करने का संकल्प लें।
- पूजा स्थान की तैयारी: घर के पूजा स्थल को साफ-सुथरा कर सजाएँ।
- भगवान की प्रतिमा शुद्धिकरण: भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से स्नान कराकर शुद्ध करें।
- सामग्री अर्पण: पीले फूल, तुलसी दल, कपूर, धूप, दीप आदि से विधि-विधान से पूजा करें।
मोक्षदा एकादशी 2025 के व्रत नियम
- उपवास: पूरे दिन फलाहार या निर्जला व्रत रखें।
- सात्विक भोजन: केवल सात्विक भोजन का ही सेवन करें।
- त्याग: झूठ, क्रोध, हिंसा, निंदा जैसी बुराइयों से दूर रहें।
- जागरण: रात में भजन-कीर्तन करें। जागरण का विशेष महत्व है।
मोक्षदा एकादशी का पारण कल, 02 दिसंबर को सुबह 06:57 बजे से 09:03 बजे के बीच किया जा सकेगा।
मोक्षदा एकादशी 2025 चालीसा
दोहा
जय जय एकादशी मइया, सब दुख हरिणी मात।
विष्णु प्रिय हरि व्रत दायिनी, करहु भक्तों पर छात॥
चालीसा
एकादशी मइया सुनो, भक्तों की अरज पुकार।
सुख-शांति के हित करहु, संकट मिटे अपार॥
जग में व्रत तेरा महान, मोक्ष पथ का है द्वार।
तुम्हरी कृपा से मिटे, पाप दोष सब भार॥
हरि स्वयं तुम संग बसें, तुलसी दल प्रिय मान।
जो श्रद्धा से व्रत करे, पावे शुभ वरदान॥
द्वादशी के दिन प्रभु, पारण का फल पावें।
भक्ति-शक्ति के संग में, हरि चरणन में जावें॥
वेद पुरानन में तुम्हारा, भूषण रूप बताय।
धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष दायिनी, तुम महिमा अपरंपार॥
भक्त जनों के हित सदा, करती हो उपकार।
अनाथ-हीन के तुम सहाय, दुख-दारिद्र्य टार॥
जो कोई नित नाम ले, करे व्रत नियम संग।
कभी न दुख का दिन देखे, रहे सुखी हर अंग॥
अंत में विनती करूं, सुन ले करुणा धाम।
एकादशी मइया कृपा करो, जागे मन में राम॥
दोहा
एकादशी व्रत कीजिए, मन-वचन-तन धार।
भवसागर से पार उतारें, हरि-भक्ति अपार॥
DISCLAIMER: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है, इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित की राय जरूर लें।
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