शरद पूर्णिमा 2026: सुख-समृद्धि के लिए मां लक्ष्मी और चंद्रदेव के सिद्ध मंत्र, जानें अर्घ्य और संपूर्ण पूजन विधि।

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Sharad Purnima 2026 Mantra: शरद पूर्णिमा पर कौन सा मंत्र पढ़ें? जानें चंद्रदेव और मां लक्ष्मी के सिद्ध मंत्र | Sharad Purnima 2026: Chandra Dev Arghya Vidhi, Mantras, and Kojagari Lakshmi Puja Rituals

शरद पूर्णिमा 2026: जब बरसेगा अमृत और जागेंगी मां लक्ष्मी! जानें चंद्रदेव को अर्घ्य देने की विधि और चमत्कारी मंत्र

आश्विन मास की वह धवल चांदनी रात, जब चंद्रमा अपनी समस्त 16 कलाओं से पूर्ण होकर आकाश से ‘अमृत’ की वर्षा करता है—वही है शरद पूर्णिमा। इसे ‘कोजागरी पूर्णिमा’ या ‘रास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस रात साक्षात देवी लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और पूछती हैं— “को जागति?” (अर्थात, कौन जाग रहा है?)।

वर्ष 2026 में शरद पूर्णिमा का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि आध्यात्मिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। आइए जानते हैं इस पावन रात्रि के सिद्ध मंत्र और संपूर्ण पूजन विधि।

चंद्रदेव की आराधना: शीतलता और मानसिक शांति का पर्व

शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। उनकी किरणों में औषधीय गुण होते हैं। इस रात चंद्रदेव को अर्घ्य देने और उनके मंत्रों का जाप करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है और मानसिक विकारों से मुक्ति मिलती है।

चंद्रदेव के सिद्ध मंत्र:

  • बीज मंत्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चंद्रमसे नम:
  • सामान्य मंत्र: ॐ सों सोमाय नम:
  • चंद्र अर्घ्य मंत्र: क्षीरोदार्णव सम्भूत अत्रिगोत्र समुद्भव। गृहाणार्घ्यं मया दत्तं रोहिण्या सहितो शशिन्।।

अर्घ्य देने की विधि:
एक चांदी या तांबे के पात्र में शुद्ध जल, थोड़ा कच्चा दूध, सफेद चंदन, अक्षत (चावल) और सफेद फूल मिलाएं। चंद्रमा के उदय होने पर उन्हें अर्घ्य दें और अपनी सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

कोजागरी लक्ष्मी पूजा: जब जागती है किस्मत

पौराणिक कथाओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी यह देखने के लिए भ्रमण करती हैं कि कौन भक्त उनकी भक्ति में लीन है। जो जागकर उनकी आराधना करता है, उसे धन-धान्य का वरदान प्राप्त होता है।

लक्ष्मी जी के विशेष मंत्र:

  • महालक्ष्मी मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।
  • सुख-समृद्धि मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मी नम:।

पूजन अनुष्ठान:

  1. रात्रि में मां लक्ष्मी की प्रतिमा के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
  2. उन्हें मखाने की खीर, बताशे और सफेद मिठाइयों का भोग लगाएं।
  3. लक्ष्मी चालीसा या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।

अमृतमयी खीर का महत्व

शरद पूर्णिमा की रात को खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा सदियों पुरानी है। माना जाता है कि चंद्रमा की किरणें जब इस खीर पर पड़ती हैं, तो वह औषधीय गुणों से युक्त ‘अमृत’ बन जाती है। अगले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में इस प्रसाद का सेवन करने से वर्ष भर आरोग्यता बनी रहती है।

विशेष सावधानियां और नियम

  • इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
  • घर की छतों या आंगन में उजाला रखें, अंधेरा न रहने दें।
  • भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की आराधना करना भी इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है, क्योंकि इसी रात भगवान ने ‘महारास’ रचाया था।

शरद पूर्णिमा 2026 का यह अवसर आपके जीवन में चंद्रदेव जैसी शीतलता और मां लक्ष्मी जैसी संपन्नता लेकर आए, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ अपनी भक्ति का दीप प्रज्वलित करें।


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