जापान पैरा बैडमिंटन: प्रमोद भगत का ‘गोल्डन’ धमाका और सुकांत कदम के पदकों का ऐतिहासिक शतक
जापान पैरा बैडमिंटन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारतीय शटलरों ने अपनी चमक बिखेरते हुए पदकों की बारिश कर दी है। तोक्यो पैरालंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट प्रमोद भगत ने पुरुष एकल SL3 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित की, वहीं सुकांत कदम ने अपने करियर का 100वां पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
छह बार के विश्व चैंपियन प्रमोद भगत ने कोर्ट पर अपना दबदबा बनाए रखते हुए पुरुष एकल SL3 के फाइनल में हमवतन भारतीय खिलाड़ी यू कुमार को मात्र 30 मिनट में 21-16, 21-8 से मात दी। एकल में स्वर्ण जीतने के बाद प्रमोद ने सुकांत कदम के साथ पुरुष युगल SL3-SU5 के फाइनल में भी अपनी चुनौती पेश की। हालांकि, इस कड़े मुकाबले में भारतीय जोड़ी को इंडोनेशिया के हिकमत रमदानी और फ्रेडी सेतियावान से 5-21, 15-21 से हार का सामना करना पड़ा और उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
अपनी जीत पर खुशी जताते हुए प्रमोद भगत ने कहा, “मैं टूर्नामेंट का अंत एक स्वर्ण और एक रजत पदक के साथ करके बेहद खुश हूं। एकल फाइनल चुनौतीपूर्ण था, खासकर तब जब यू कुमार ने शुरुआती बढ़त बना ली थी, लेकिन मैंने धैर्य बनाए रखा और अपने खेल पर ध्यान केंद्रित किया। एक बार जब मैंने लय हासिल कर ली, तो मैं मुकाबले पर नियंत्रण बनाने में सफल रहा। युगल का परिणाम हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, लेकिन मुझे गर्व है कि हमने कड़ा संघर्ष किया। हर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट सीखने का एक मौका है और मैं जापान से मिली इन सकारात्मक यादों को आगे ले जाऊंगा।”
यह टूर्नामेंट सुकांत कदम के लिए भी बेहद यादगार रहा। 12 वर्षों के शानदार करियर के बाद सुकांत ने अपने कुल पदकों का शतक (100 पदक) पूरा कर लिया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ उन्होंने पुरुष युगल में रजत और पुरुष एकल SL4 में भी रजत पदक अपने नाम किया। एकल फाइनल में उन्हें फ्रांस के दिग्गज लुकास माजूर के हाथों 8-21, 16-21 से हार मिली।
अपनी उपलब्धि पर भावुक होते हुए कदम ने कहा, “करियर के 100 पदक पूरे करना मेरे लिए एक स्वप्निल पल है। जब मैंने 12 साल पहले खेलना शुरू किया था, तब कभी नहीं सोचा था कि इस मुकाम तक पहुँचूँगा। इस सफर में जीत-हार और कई उतार-चढ़ाव आए, जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा। मैं उन सभी का आभारी हूं जिन्होंने मेरा समर्थन किया। मैं 100 पदकों को अपनी मंजिल नहीं, बल्कि एक नई प्रेरणा मानता हूं जो मुझे भारत के लिए और अधिक गौरव हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी।”
भारतीय दल की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। चिराग बरेठा और सिंगापुर के वेई मिंग टे की जोड़ी ने पुरुष युगल SU5 में स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगा लहराया। शशांक कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो कांस्य पदक जीते—पहला पुरुष एकल WH1 में और दूसरा अम्मू मोहन के साथ मिश्रित युगल WH1-WH2 में। इसके अलावा, दीप रंजन बिसोई और कुलदीप महकुल की जोड़ी ने पुरुष युगल SL3-SU5 में कांस्य पदक जीता, जबकि इसी वर्ग में तकर बीरी और हर्षित चौधरी भी तीसरे स्थान पर रहे। अभिजीत सखुजा ने भी पुरुष एकल SL4 में कांस्य पदक जीतकर भारत की झोली में एक और पदक डाल दिया।
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