आकांक्षा दुबे की मौत की CBI जांच नहीं होगी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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आकांक्षा दुबे की मौत की CBI जांच नहीं होगी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज Open banner options Stuck on what to write next?

भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे की संदिग्ध मौत के मामले में उनकी मां मधु दुबे को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने CBI जांच या दोबारा जांच की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा कि मृतका का शव उपलब्ध नहीं होने के कारण अब मौत के तरीके और कारण की नए सिरे से जांच संभव नहीं है। हालांकि, याची पक्ष ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

होटल के कमरे में मिला था आकांक्षा का शव

आकांक्षा दुबे का शव 26 मार्च 2023 को वाराणसी के सारनाथ इलाके स्थित एक होटल के कमरे में मिला था। अगले दिन यानी 27 मार्च को सारनाथ थाने में FIR दर्ज की गई थी। उनकी मां मधु दुबे ने बेटी की मौत को आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

मधु दुबे की ओर से CBI जांच कराने या मामले की दोबारा जांच के लिए निर्देश देने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

जस्टिस राजीव मिश्रा और जस्टिस डॉ. अजय कुमार द्वितीय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया कि इस मामले में IPC की धारा 306 के तहत 3 जून 2023 को चार्जशीट दाखिल हो चुकी है।

अदालत ने यह भी कहा कि चार्जशीट दाखिल किए जाने के खिलाफ कोई आपत्ति याचिका नहीं दी गई थी। ऐसे में सिर्फ यह दावा कि घटना आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या थी, दोबारा जांच का पर्याप्त आधार नहीं बनता।

याची पक्ष ने फॉरेंसिक साक्ष्यों का दिया हवाला

मधु दुबे की ओर से अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने अदालत में कुछ चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों का हवाला दिया। याची पक्ष का दावा था कि मृतका के निजी अंग से जुड़े साक्ष्यों की जांच में आरोपी से मिलान होने की बात सामने आई थी।

इसी आधार पर याची पक्ष ने मौत को आत्महत्या के बजाय हत्या बताते हुए मामले की नए सिरे से जांच की मांग की।

हालांकि, अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर भी सवाल किया। कोर्ट ने पूछा कि क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट को चुनौती देते हुए दोबारा मेडिकल परीक्षण की मांग की गई थी। इस पर याची के अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि ऐसी कोई आपत्ति दाखिल नहीं की गई थी।

शव उपलब्ध नहीं होने को कोर्ट ने माना अहम तथ्य

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मृतका का शव अब उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में मौत के कारण और घटना के तरीके की दोबारा चिकित्सकीय जांच कर पाना संभव नहीं है।

अदालत ने इस आधार पर CBI जांच और मामले की पुनः जांच की मांग को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।

अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

हाईकोर्ट के फैसले के बाद याची पक्ष के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने कहा है कि इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। यानी आकांक्षा दुबे की मौत का मामला फिलहाल खत्म नहीं हुआ है और आगे सर्वोच्च अदालत में कानूनी लड़ाई जारी रह सकती है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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