दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सोमवार को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने एक याचिका का उल्लेख किया गया। याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने के निर्देश देने की मांग की है। कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
याचिकाकर्ता ने क्या कहा?
याचिका का उल्लेख करते हुए वकील ने कहा कि दिल्ली पुलिस छात्रों और आम नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दे रही है। उनके मुताबिक, इसमें पंजीकृत राजनीतिक दलों के पदाधिकारी और सांसद भी शामिल हैं।
वकील ने इसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताते हुए कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की। याचिका में जंतर-मंतर समेत दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति सुनिश्चित करने के लिए निर्देश मांगे गए हैं।
CJI सूर्यकांत ने क्या पूछा?
CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से पूछा कि राहत क्या मांगी गई है, याचिकाकर्ता कौन है और क्या यह जनहित याचिका यानी PIL है।
वकील ने बताया कि मुख्य मांग दिल्ली पुलिस को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने का निर्देश देने की है। इस पर CJI ने कहा कि कोर्ट पहले यह पता लगाएगा कि इसी तरह के कोई मामले पहले से लंबित या सूचीबद्ध तो नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा और उसके बाद दलीलें सुनी जाएंगी।
जंतर-मंतर पर पहले से जारी है विरोध
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी SIR यानी Special Intensive Revision और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं और CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
रविवार को भी प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की ओर बढ़ने से रोका गया। पुलिस के अनुसार, करीब 120 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में संख्या इससे ज्यादा बताई गई। दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं थी और निषेधाज्ञा लागू थी।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान हिरासत और पुलिस कार्रवाई को लेकर प्रदर्शनकारियों ने धक्का-मुक्की और बदसलूकी के आरोप लगाए हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई और न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया गया।
इससे पहले तीन महिला पत्रकारों ने भी प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है।
अब कोर्ट की सुनवाई पर नजर
सुप्रीम कोर्ट का याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमत होना इस पूरे विवाद में एक महत्वपूर्ण कानूनी कदम है। हालांकि, फिलहाल कोर्ट ने प्रदर्शन की अनुमति देने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है।
अब अगली सुनवाई में यह देखा जाएगा कि शांतिपूर्ण सभा और विरोध प्रदर्शन के अधिकार तथा सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है। दिल्ली में जारी राजनीतिक विरोध के बीच इस मामले की सुनवाई पर सभी पक्षों की नजर रहेगी।
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