गोरखपुर का वैश्विक विस्तार: वियतनाम के दो प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के साथ समझौता, शिक्षा के क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात
गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) ने अपनी वैश्विक पहुँच को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। विश्वविद्यालय वियतनाम के दो प्रतिष्ठित संस्थानों – हो ची मिन्ह सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंस और हो ची मिन्ह सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी – के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने जा रहा है। यह ऐतिहासिक पल 9 अक्टूबर 2025 को राज्यपाल भवन, लखनऊ में घटित होगा, जो विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य पर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल, राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण, तथा वियतनाम से पधारे प्रतिनिधिमंडल के सदस्य गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
वैश्विक सहभागिता का एक नया अध्याय
यह समझौता भारत और वियतनाम के बीच ‘शैक्षणिक कूटनीति’ के एक नवोन्मेषी युग की शुरुआत का प्रतीक है। यह दोनों देशों के बीच शैक्षिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, और एक सशक्त वैश्विक शिक्षा नेटवर्क के निर्माण हेतु साझा प्रतिबद्धता को प्रगट करता है। विश्वविद्यालय की कुलपति, प्रोफेसर पूनम टंडन ने इस उपलब्धि पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “यह समझौता हमारे विश्वविद्यालय की वैश्विक साझेदारी, ज्ञान के निरंतर प्रवाह, और नवाचार के प्रति अटूट निष्ठा को और बल प्रदान करता है। यह माननीय राज्यपाल महोदया के उस दूरदर्शी दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत प्रदेश के विश्वविद्यालयों की अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और शैक्षणिक प्रभाव को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है।”
समझौते के प्रमुख उद्देश्य
यह समझौता शिक्षा, अनुसंधान और संस्कृति के क्षेत्र में एक सुदृढ़ और दीर्घकालिक सहयोग की नींव रखेगा। इसके प्रमुख आयाम निम्नलिखित हैं:
- शैक्षणिक सहयोग: सीमाओं के पार शैक्षणिक कार्यक्रमों, संयुक्त अनुसंधान, ज्ञान साझाकरण, और संकाय विकास को बढ़ावा देना।
- सांस्कृतिक एवं व्यावसायिक आदान-प्रदान: छात्रों और शिक्षकों के विनिमय कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक समझ को गहरा करना और बहुसांस्कृतिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना।
- संयुक्त अनुसंधान एवं इंटर्नशिप: सहयोगी अनुसंधान परियोजनाओं, संयुक्त प्रकाशनों, और विभिन्न विषयों में इंटर्नशिप के अवसरों का सृजन।
- सतत साझेदारी: कार्यशालाओं, सेमिनारों और अध्ययन यात्राओं के आयोजन के माध्यम से दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग को मजबूत करना।
- संयुक्त, द्वैत्य एवं ट्विनिंग डिग्री कार्यक्रम: विभिन्न अकादमिक क्षेत्रों में संयुक्त या द्वैत्य डिग्री कार्यक्रमों को आरंभ करने की संभावनाओं का अन्वेषण।
शैक्षणिक कूटनीति और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
यह सहयोग भारत सरकार की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” (Act East Policy) के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है। यह समझौता विश्वविद्यालयों के मध्य ‘पीपल-टू-पीपल कनेक्टिविटी’ को बढ़ावा देने और सतत शैक्षणिक विकास को प्रोत्साहित करने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और वियतनामी विश्वविद्यालयों के बीच यह साझेदारी न केवल अनुसंधान और शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि छात्रों में नवाचार, रोजगार क्षमता और वैश्विक दक्षता को भी अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ करेगी।
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