“ये आत्महत्या नहीं, मर्डर है!” पप्पू यादव की दहाड़—आखिर कार्रवाई से क्यों बच रहा हॉस्टल संचालक?

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नीट छात्रा की मौत पर पप्पू यादव का तीखा प्रहार: ‘यह आत्महत्या नहीं मर्डर है, आखिर किसे बचाने की हो रही है कोशिश?’

बिहार के पूर्णिया से सांसद और कद्दावर नेता पप्पू यादव ने पटना में नीट छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर इसे ‘मर्डर’ करार देते हुए आरोप लगाया कि हॉस्टल के भीतर एक बेटी की हत्या हुई है और अब रसूखदारों को बचाने के लिए पूरे मामले को दबाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने हैरानी जताई कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी हॉस्टल संचालक अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों है?

मंगलवार को पटना के उस गर्ल्स हॉस्टल का मुआयना करने पहुंचे पप्पू यादव ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा, “यहां सब मिले हुए हैं। मैं शुरू से कह रहा हूं कि इस बिना रजिस्ट्रेशन वाले हॉस्टल में छात्रा की जान ली गई है। हैरानी की बात है कि मामले की शुरुआत से ही इसे रफा-दफा करने का प्रयास किया गया।”

सांसद ने सवालों की झड़ी लगाते हुए पूछा, “आखिर पुलिस मामले को आत्महत्या का रूप देने पर क्यों तुली है? हॉस्टल संचालक की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है? अगर पीएमसीएच और वहां हुए पोस्टमार्टम पर भरोसा नहीं है, तो सच क्या है? क्या हमारी बेटियां कहीं भी सुरक्षित हैं? सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना के वक्त हॉस्टल के सीसीटीवी कैमरे बंद क्यों रखे गए थे?”

न्याय की मांग करते हुए पप्पू यादव ने कहा कि हॉस्टल संचालक को तत्काल जेल भेजा जाना चाहिए और मामले की तह तक जाने के लिए गहन जांच जरूरी है। उन्होंने एलान किया कि वे इस मुद्दे को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और मामले की सीबीआई जांच की मांग करेंगे।

वहीं, राहुल गांधी के ‘भाजपा-आरएसएस जनता को डराना चाहते हैं’ वाले बयान का समर्थन करते हुए पप्पू यादव ने कहा, “यह बात खुद सुप्रीम कोर्ट के रुख से स्पष्ट हो चुकी है। चुनाव के वक्त ईडी और सीबीआई का डर दिखाकर संवैधानिक संस्थाओं को दबाया जा रहा है। ममता बनर्जी ने उन्हें ‘जैसे को तैसा’ जवाब दिया है, क्योंकि भाजपा को नियंत्रित करने के लिए ममता बनर्जी जैसी सुपरपावर की ही जरूरत है।”

कांग्रेस नेता ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि आज देश में दो विचारधाराएं काम कर रही हैं— राहुल गांधी महात्मा गांधी के दिखाए सत्य के मार्ग पर चल रहे हैं, तो वहीं ममता बनर्जी सुभाष चंद्र बोस के क्रांतिकारी अंदाज में संघर्ष कर रही हैं। उन्हें अपने मिशन में आगे बढ़ने देना चाहिए।


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