नए भारत के शिखर पर न्याय का सूर्य उदय: जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के मुख्य न्यायाधीश
सोमवार को राष्ट्रपति भवन की भव्यता के बीच, एक ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न्यायपालिका के नए प्रकाश स्तंभ, जस्टिस सूर्यकांत को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह शुभ अवसर केवल एक व्यक्ति के उत्थान का प्रतीक नहीं था, बल्कि भारत की न्यायिक व्यवस्था में एक नए अध्याय का आरम्भ था।
इस महत्वपूर्ण समारोह में देश के गणमान्य व्यक्तियों का एक विशाल समूह उपस्थित था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, और पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई जैसे दिग्गजों ने इस पल की गरिमा को बढ़ाया। इसके अतिरिक्त, यह समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण था, जिसमें भूटान, केन्या, मलेशिया, ब्राजील, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की गरिमामयी उपस्थिति ने भारत की न्यायिक श्रेष्ठता को रेखांकित किया।
जस्टिस सूर्यकांत अब सीजेआई भूषण आर गवई के प्रतिष्ठित पद को सुशोभित करेंगे। राष्ट्रपति मुर्मू ने सीजेआई गवई की सुविचारित सिफारिश के आलोक में, संविधान के अनुच्छेद 124 के खंड (2) द्वारा प्रदत्त असीम शक्तियों का उपयोग करते हुए, जस्टिस सूर्यकांत के नाम पर मुहर लगाई, और उन्हें भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया। यह नियुक्ति देश में न्याय के सुचारू प्रवाह और सुशासन की निरंतरता का आश्वासन देती है।
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