बिहार की चुनावी हवा और शीतकालीन सत्र: क्या होगा संसद का मिजाज?
14 नवंबर को बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के साथ ही संसद के शीतकालीन सत्र की दिशा तय होने वाली है। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी महागठबंधन के बीच यह मुकाबला अत्यंत कड़ा माना जा रहा है। चुनाव परिणामों का असर संसद में भी दिखाई दे सकता है, जहां कई विपक्षी दल भारत द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ समाप्त किए जाने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार किए गए दावों पर सरकार से स्पष्टीकरण की मांग कर सकते हैं। यह मुद्दा निश्चित रूप से सत्र में गरमागरम बहस का कारण बन सकता है।
सत्र की तारीखों की घोषणा होते ही कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार पर तंज कसते हुए इसे “बहुत देर से” और “संक्षिप्त” सत्र बताया। ‘एक्स’ पर अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा, “यह सत्र केवल 15 कार्यदिवसों का होगा। इससे क्या संदेश दिया जा रहा है? स्पष्ट है कि सरकार के पास न तो कोई खास काम है, न ही किसी विधेयक को पारित कराने की तत्काल आवश्यकता है, और शायद किसी भी प्रकार की खुली बहस की अनुमति नहीं है।” रमेश की यह टिप्पणी सत्र की अवधि और एजेंडे को लेकर विपक्षी दलों की चिंता को दर्शाती है। अब देखना यह है कि यह छोटा सत्र कितना सार्थक साबित होता है और बिहार चुनाव के परिणाम इस पर कितना प्रभाव डालते हैं।
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