2022 के सियासी संकट पर अशोक गहलोत का बड़ा खुलासा: ‘वो आलाकमान के खिलाफ बगावत नहीं थी!’

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अशोक गहलोत ने 2022 के सियासी संकट पर तोड़ी चुप्पी, कहा- आलाकमान के खिलाफ नहीं था विद्रोह

Ashok Gehlot: राजस्थान की राजनीति के ‘जादूगर’ कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 25 सितंबर 2022 के उस बहुचर्चित सियासी घटनाक्रम पर अपनी चुप्पी तोड़ी है, जिसने दिल्ली से जयपुर तक हलचल मचा दी थी। गहलोत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उस वक्त जो कुछ भी हुआ, उसे आलाकमान के खिलाफ ‘विद्रोह’ के तौर पर गलत तरीके से पेश किया गया। उनके अनुसार, वह विरोध पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट के नाम की संभावनाओं को लेकर विधायकों की गहरी असहमति का नतीजा था।

विद्रोह आलाकमान से नहीं, ‘चेहरे’ से था: गहलोत

अशोक गहलोत ने इस बात पर जोर दिया कि 2022 की उस घटना की व्याख्या गलत ढंग से की गई है। उन्होंने खुलासा किया— “वह विरोध आलाकमान के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यक्ति के नाम के खिलाफ था जो मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा था।” गहलोत का दावा है कि उनके समर्थक विधायकों ने उस नाजुक मोड़ पर पार्टी के प्रति अपनी अटूट निष्ठा साबित की थी और सरकार को गिरने से बचाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।

जब अध्यक्ष पद की दहलीज पर खड़े थे गहलोत

पूर्व मुख्यमंत्री ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि तब उनका नाम कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल था। हालांकि, परिस्थितियों ने ऐसा करवट लिया कि पूरा घटनाक्रम विवादों में घिर गया और उनकी छवि को बेवजह नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उस समय बैठक में औपचारिक प्रस्ताव पारित न हो पाने पर उन्होंने खुद सोनिया गांधी से मिलकर गहरा खेद व्यक्त किया था।

#WATCH | Jaipur, Rajasthan: Congress leader Ashok Gehlot says, “…If Sonia Gandhi and the Congress were making me the Congress President, would I have refused? This was a conspiracy. The observers arrived suddenly…” pic.twitter.com/ofKjEzUXjz

— ANI (@ANI) June 7, 2026

सचिन पायलट को गहलोत की सलाह- ‘हकीकत स्वीकार करें’

सचिन पायलट का जिक्र करते हुए गहलोत ने कहा कि उन्हें अब वास्तविकता को स्वीकार कर लेना चाहिए। उन्होंने नसीहत भरे लहजे में कहा— “सच्चाई का कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। सचिन को उस समय की जमीनी परिस्थितियों को समझना चाहिए।” गहलोत ने यह भी जोड़ा कि राजनीति में गलतियां किसी से भी हो सकती हैं, लेकिन उन गलतियों को स्वीकार करने में कभी हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए।

25 सितंबर के घटनाक्रम को लेकर किए गए दुष्प्रचार के संबंध में:
आज मुझे सब कुछ मिल गया, मैं अति संतुष्ट पॉलिटिशियन हूँ देश का। अब मैं पद के पीछे नहीं हूँ। कोई पद ज़बरदस्ती आकर मुझपर पड़ जाए तो अलग बात है देखो। मैं कोई पद के लिए नहीं हूँ कि पद के लिए मैं ये करूँ, वो करूँ, कुछ नहीं… pic.twitter.com/06nauxjKLx

— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) June 7, 2026

मानेसर की बगावत और पुरानी यादें

बातचीत के दौरान गहलोत ने 2020 के उस सियासी तूफान का भी जिक्र किया, जब सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर चले गए थे। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे उस वक्त सरकार पर खतरा मंडरा रहा था। गहलोत ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ ‘विद्रोही’ होने की धारणा महज एक दुष्प्रचार था, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी।

‘हम उनके दुश्मन नहीं, परिवार जैसा रिश्ता है’

पायलट के साथ अपने रिश्तों पर नरमी दिखाते हुए गहलोत ने कहा, “मैं उनके परिवार को उनके बचपन से जानता हूं। हम उनके दुश्मन नहीं हैं।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पायलट ने राजनीति में लंबा सफर तय किया है और अब वह काफी अनुभवी हो चुके हैं। गहलोत ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए कहा कि यूपीए सरकार के दौरान उन्होंने खुद सचिन पायलट को केंद्रीय मंत्री बनवाने में मदद की थी, हालांकि पायलट ने सार्वजनिक मंचों पर कभी इसका जिक्र नहीं किया।

एकजुटता ही कांग्रेस का असली मंत्र

मौजूदा राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए गहलोत ने कहा कि कांग्रेस और देश दोनों ही एक चुनौतीपूर्ण दौर का सामना कर रहे हैं। ऐसे में वक्त की मांग है कि सभी नेता अपने आपसी मतभेदों को किनारे रखकर साथ आएं। उन्होंने आह्वान किया कि सचिन पायलट हों, गोविंद सिंह डोटासरा हों या टीकाराम जूली, सभी को संगठन की मजबूती के लिए एक जाजम पर बैठना होगा।

राहुल गांधी की तारीफ और भविष्य का विजन

गहलोत ने गर्व के साथ बताया कि पुष्कर के हालिया प्रशिक्षण शिविर में राहुल गांधी ने राजस्थान कांग्रेस के काम की जमकर सराहना की थी, खासकर डोटासरा और टीकाराम जूली के नेतृत्व को सराहा था। अपनी भूमिका पर गहलोत ने स्पष्ट कर दिया— “मैंने राजनीति में सब कुछ पा लिया है। तीन बार मुख्यमंत्री रहना छोटी बात नहीं है, अब मैं किसी पद की रेस में नहीं हूं।” उन्होंने अंत में कहा कि भविष्य में मुख्यमंत्री कौन बनेगा यह समय तय करेगा, फिलहाल उनका एकमात्र लक्ष्य पार्टी को मजबूत करना है।

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