
Bageshwar Dham Sarkar: सनातन धर्म में संध्या काल को बेहद पवित्र माना गया है। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार, दिन और रात के मिलन के इस विशेष समय में हमारी कुछ गलतियां जीवन में भारी संकट, अशांति और आर्थिक तंगी का कारण बन सकती हैं। बाबा का मानना है कि सूर्यास्त के समय की गई लापरवाही सीधे तौर पर व्यक्ति के सौभाग्य को प्रभावित करती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि उनके अनुसार शाम के समय किन कार्यों से दूरी बनाना अनिवार्य है।
सावधान! शाम के वक्त भूलकर भी न करें ये 4 काम
1. घर की दहलीज पर बैठना या रोना
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी कहते हैं कि सूर्यास्त का समय घर में सुख-समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी के आगमन का होता है। ऐसे पावन समय में यदि कोई व्यक्ति घर की मुख्य दहलीज पर बैठता है या वहां बैठकर विलाप (रोना) करता है, तो वह अनजाने में नकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। मान्यता है कि ऐसा करने से माँ लक्ष्मी द्वार से ही लौट जाती हैं, जिससे घर में दरिद्रता आती है।
2. सूर्यास्त के दौरान भोजन ग्रहण करना
बागेश्वर धाम सरकार के अनुसार, सूर्यास्त के ठीक पहले और बाद का समय भोजन के लिए उचित नहीं है। उनके अनुसार, इस संधि काल में भोजन करने से न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है, बल्कि उसकी आयु भी क्षीण होती है। शास्त्रों का हवाला देते हुए वे इस समय को केवल ईश-वंदना के लिए समर्पित करने की सलाह देते हैं।
3. शारीरिक संबंध (मैथुन) बनाना
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी का स्पष्ट मत है कि शाम का समय संध्यावंदन और आत्म-चिंतन का होता है। इस काल में कामवासना में लिप्त होना वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय पर बनाए गए शारीरिक संबंधों या होने वाले गर्भाधान से जो संतान उत्पन्न होती है, उसमें नकारात्मक प्रवृत्तियों और तामसिक गुणों का प्रभाव अधिक हो सकता है।
4. विद्या का अध्ययन करना
अक्सर छात्र शाम को पढ़ाई करना पसंद करते हैं, लेकिन बाबा के अनुसार सूर्यास्त के समय किताबों से दूरी बना लेनी चाहिए। उनका मानना है कि इस विशेष समय में अध्ययन करने से व्यक्ति के अर्जित पुण्य कम होते हैं और मानसिक एकाग्रता में भी कमी आती है। यह समय ध्यान और प्रार्थना का है, न कि रटने या पढ़ने का।
कौन हैं धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री?
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित गढ़ा गांव के ‘बागेश्वर धाम सरकार’ के पीठाधीश्वर हैं। भगवान हनुमान के अनन्य भक्त के रूप में प्रसिद्ध शास्त्री जी आज देश-दुनिया के चर्चित धर्मगुरुओं में से एक हैं। वे अपने “दिव्य दरबार” और कथाओं के माध्यम से सनातन परंपराओं और जन-कल्याण से जुड़े विषयों पर बेबाकी से अपनी राय रखने के लिए जाने जाते हैं।
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