भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में फिर से जमी बर्फ पिघलने लगी है, क्या यह शीत युद्ध का अंत है?
हाल के हफ्तों में, भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक उल्लेखनीय गर्माहट देखी गई है, जो पहले की “ठंडक” के बिल्कुल विपरीत है। यह नई प्रगति बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) की दिल्ली यात्रा के साथ शुरू हुई, जिसने दोनों देशों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने की शुरुआत की। अब, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शेख हसीना की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी, खालिदा जिया को भेजा गया एक संदेश, द्विपक्षीय संबंधों में यथास्थिति बहाल करने के भारत के प्रयासों का संकेत देता है। दिलचस्प बात यह है कि भारत के खिलाफ अपनी पूर्व की तीखी बयानबाजी में नरमी बरतने वाली जिया के लिए यह संदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले हफ्ते, बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार, मोहम्मद तौहीद हुसैन ने स्पष्ट किया कि ढाका और दिल्ली के बीच संबंधों में कुछ “अनसुलझे” मुद्दे मौजूद हैं, जिनमें हसीना से जुड़ा मामला भी शामिल है। ढाका ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार, हुसैन ने कहा, “हमारे हित बने रहेंगे और उन्हें सुरक्षित करने के हमारे प्रयास जारी रहेंगे… लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसके कारण बाकी सब कुछ रुक जाएगा।” उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जब तक प्रत्यर्पण का मुद्दा सुलझ नहीं जाता, हसीना का मामला द्विपक्षीय संबंधों में एक अड़चन बना रहेगा।
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया, जिन्होंने भारत के साथ हमेशा मधुर संबंध बनाए रखे थे, को पिछले साल हुए दंगों के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी, जिसमें 500 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। अब, जब बांग्लादेश में चुनाव नज़दीक हैं और उनकी पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, प्रधानमंत्री मोदी का जिया के लिए संदेश कूटनीतिक चर्चाओं को एक नई दिशा दे रहा है।
अंग्रेजी और बंगाली दोनों भाषाओं में लिखे एक पोस्ट में, प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) प्रमुख के बिगड़ते स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की और उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए “हर संभव सहायता” की पेशकश की। यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि बीएनपी के भारत के साथ संबंध हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं। दोनों नेताओं की आखिरी मुलाकात 2015 में हुई थी, जब प्रधानमंत्री मोदी बांग्लादेश के दौरे पर गए थे और उस समय जिया विपक्ष की नेता थीं। क्या यह नया कूटनीतिक कदम भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नए युग की शुरुआत करेगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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