ट्रंप की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ईरान के कड़े तेवर, क्या ‘इस्लामाबाद समझौता’ टाल पाएगा महायुद्ध?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान युद्ध पर होने वाली बहुप्रतीक्षित प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले खाड़ी में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने एक बार फिर अपना रुख सख्त करते हुए अमेरिका की 15 सूत्री योजना को सिरे से खारिज कर दिया है। ‘ईरान इंटरनेशनल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने इस शांति योजना को “अत्यंत महत्वाकांक्षी और अतार्किक” करार दिया है। बगाई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धमकियों के बीच कोई बातचीत संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की अमेरिकी कोशिशें युद्ध अपराध मानी जाएंगी। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान ने मध्यस्थों के जरिए भेजे गए प्रस्तावों पर अपना जवाबी मसौदा तैयार कर लिया है, जिसे वक्त आने पर साझा किया जाएगा।
ईरान का कहना है कि उसका पूरा ध्यान फिलहाल देश की रक्षा पर है, लेकिन वह सैन्य प्रयासों के साथ-साथ कूटनीति के दरवाजे भी खुले रखे हुए है। इसी बीच, युद्ध के बादलों के बीच शांति की एक धुंधली किरण भी दिखाई दी है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि अमेरिका और ईरान को शत्रुता समाप्त करने का एक नया फॉर्मूला मिला है, जो सोमवार से ही प्रभावी हो सकता है। ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस शांति योजना का खाका तैयार किया है और इसे रात भर में दोनों देशों के साथ साझा किया गया है। इस योजना में दो-स्तरीय दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें पहले चरण में तत्काल युद्धविराम और उसके बाद एक व्यापक समझौते पर काम किया जाएगा।
इस प्रस्तावित समझौते की सबसे बड़ी शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है। सूत्र बताते हैं कि सभी बिंदुओं पर आज ही सहमति बनना अनिवार्य है, जिसे एक ‘समझौता ज्ञापन’ के रूप में पाकिस्तान के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से अंतिम रूप दिया जाएगा। वर्तमान में पाकिस्तान ही दोनों कट्टर दुश्मनों के बीच वार्ता का एकमात्र जरिया बना हुआ है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अस्थायी ‘इस्लामाबाद समझौते’ के तहत युद्धविराम लागू होते ही समुद्री व्यापार के लिए अहम जलडमरूमध्य खोल दिया जाएगा, जबकि मुख्य समझौते के लिए 15-20 दिनों का समय दिया जाएगा। इस योजना के अंतिम चरण के लिए इस्लामाबाद में आमने-सामने की वार्ता का प्रस्ताव है। हालांकि, इस बड़ी कूटनीतिक हलचल पर फिलहाल रहस्य बरकरार है। न तो अमेरिकी और न ही ईरानी अधिकारियों ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। वहीं, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भी इस संवेदनशील मुद्दे पर फिलहाल कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
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