मारवान बरगौती: फिलिस्तीनी मंडेला और उनकी रिहाई का इज़राइली इनकार

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
6 Min Read
मारवान बरगौती, बहुत से लोग 'फिलिस्तीन का नेल्सन मंडेला' कहते हैं.

मारवान बरगौती: फिलिस्तीनी नेल्सन मंडेला या “खतरा”?

मध्य पूर्व में शांति की तलाश जारी है, और इस शांति की कीमत क्या होगी, यह सवाल अभी भी अनसुलझा है। हमास और इजराइल के बीच जारी युद्धविराम और कैदियों की अदला-बदली के समझौते के बीच, एक नाम है जो सबकी जुबान पर है – मारवान बरगौती। कुछ उन्हें ‘फिलिस्तीन का नेल्सन मंडेला’ कहते हैं, तो कुछ के लिए वे ‘खतरा’ हैं। हमास उन्हें आज़ाद कराना चाहता है, लेकिन इजराइल ने स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है।

कौन हैं मारवान बरगौती?

1959 में पश्चिमी तट के कोबर गांव में जन्मे मारवान बरगौती, फिलिस्तीनी राजनीति के सबसे चर्चित और विवादित चेहरों में से एक हैं। बीर जीत विश्वविद्यालय में छात्र नेता के रूप में पहचान बनाने के बाद, वे 1987 के पहले इंतिफादा (विद्रोह) के प्रमुख आयोजकों में से एक बन गए। दूसरे इंतिफादा के दौरान, इजराइल ने उन पर फतह से जुड़े सशस्त्र समूहों का नेतृत्व करने का आरोप लगाया। यह वही मोड़ था जब बरगौती की किस्मत ने करवट ली। 2004 में, उन्हें पांच लोगों की हत्या के जुर्म में दोषी ठहराया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। मारवान बरगौती ने उस समय कहा था, “मैं आतंकवादी नहीं हूं, लेकिन मैं शांतिवादी भी नहीं हूं।”

फिलिस्तीनियों के ‘नेल्सन मंडेला’ क्यों कहे जाते हैं बरगौती?

बरगौती जेल में हैं, लेकिन उनका प्रभाव जेल की दीवारों से कहीं आगे तक फैला हुआ है। वे दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) के समर्थक हैं, लेकिन कब्जे के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध को भी जायज मानते हैं। यह दोहरी पहचान उन्हें फिलिस्तीनी समाज में खास बनाती है। कई फिलिस्तीनी उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो हमास और फतह जैसे प्रतिद्वंद्वी गुटों को भी एकजुट कर सकता है। 2021 में, बरगौती ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाते हुए जेल के भीतर से ही अपनी मतदाता सूची दर्ज कराई थी। वहीं, कैदियों के बेहतर व्यवहार के लिए उन्होंने 40 दिन लंबी भूख हड़ताल का नेतृत्व किया। यही वजह है कि बहुत से लोग उन्हें “फिलिस्तीन का नेल्सन मंडेला” कहते हैं।

अवेयर मीडिया नेटवर्क

इजराइल क्यों रिहा नहीं करना चाहता बरगौती को?

हाल के कैदियों की अदला-बदली के समझौते में, जहां हमास और इजराइल के बीच 20 इजराइली बंधकों के बदले करीब 250 फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा किए जाने की उम्मीद है, तब भी इजराइल ने बरगौती का नाम सूची से बाहर रखा है। इजराइल बरगौती को एक आतंकवादी नेता के रूप में देखता है और उसे डर है कि उनकी रिहाई से वे फिलिस्तीनी राजनीति में एकजुटता का चेहरा बन सकते हैं। यही डर इजराइल के इनकार की असली वजह है। शुक्रवार को इजराइली अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की कि बरगौती मौजूदा डील का हिस्सा नहीं होंगे।

बरगौती की रिहाई पर अड़ा है समूह

हमास के वरिष्ठ नेता मूसा अबू मरजूक ने अल जजीरा से बातचीत में स्पष्ट कहा है कि संगठन बरगौती और अन्य प्रमुख हस्तियों की रिहाई पर अड़ा हुआ है। हमास ने अब तक हर कैदी सौदे में बरगौती की रिहाई की मांग की है। समूह का मानना है कि बरगौती जैसे नेताओं की मौजूदगी फिलिस्तीनी एकता के लिए आवश्यक है। हालांकि, इजराइल की नजर में यह “एक नए खतरे का दरवाजा खोलना” है।

किन कैदियों को रिहा किया जाएगा?

इस कैदियों की अदला-बदली के समझौते में, अधिकांश कैदी हमास और फतह से जुड़े हैं, जिन्हें 2000 के दशक में गिरफ्तार किया गया था। कई पर गोलीबारी, बम विस्फोट और हमलों में इजराइली नागरिकों, बसने वालों और सैनिकों की हत्या के आरोप हैं। सबसे उम्रदराज कैदी समीर अबू नामा (64 वर्ष) हैं, जिन्हें 1986 में जेल हुई थी। सबसे कम उम्र के मोहम्मद अबू कातिश हैं, जिन्हें 2022 में 16 साल की उम्र में गिरफ्तार किया गया था। रिहाई के बाद, आधे से ज्यादा कैदियों को या तो गाजा भेजा जाएगा या फिलिस्तीनी इलाकों से बाहर कर दिया जाएगा।

बरगौती की लोकप्रियता बरकरार

कैद के बावजूद, बरगौती की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। अगस्त में, वे आखिरी बार सार्वजनिक रूप से तब दिखे जब इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर ने जेल में उनसे मुलाकात का एक वीडियो साझा किया था। वीडियो में बेन-ग्वीर ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा था कि इजराइल देश के खिलाफ काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को “मिटा देगा”। पर यही वीडियो बरगौती के समर्थकों के बीच उनकी “दृढ़ छवि” को और मजबूत कर गया।

अन्य खबरें:

  • मालदीव में आतंकियों का खतरा! अमेरिका ने संभावित हमलों को लेकर जारी की नई ट्रैवल एडवाइजरी।
  • अफगानिस्तान हमारा नंबर 1 दुश्मन! पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्यों कही यह बात।
  • पाकिस्तान दहला! खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल पर आत्मघाती हमला, घंटों चली मुठभेड़ में 7 पुलिसकर्मी की मौत।

Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version