सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री का सनसनीखेज खुलासा: पीएम मोदी की असली ताकत का सच सामने!
दुनिया के सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट वाले देश सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज येओ ने एक ऐसा राज खोला है, जिसने भारत और पूरी दुनिया को सकते में डाल दिया है। येओ ने मात्र 10 सेकंड में यह बता दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं क्यों भेजी थीं, और इसके पीछे पीएम मोदी की असली ताकत क्या है।
ज़ाग्रेब स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड मैनेजमेंट में बोलते हुए, येओ ने अमेरिका की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “अमेरिका भारत पर दबाव बनाने में विफल रहा, और यही कारण है कि उन्होंने बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं भेजीं।” येओ ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखी।
येओ ने यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में भारत के रुख का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि भारत रूस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटा, भले ही अमेरिका इस पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के हालिया युद्ध के बाद भारत को अमेरिका से मिले समर्थन की कमी को भी उजागर किया, जब ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया था।
ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर लगाए गए आरोपों और संभावित टैरिफ की धमकियों के बावजूद, भारत अपने रुख पर अडिग रहा। इसी अडिगता को देखकर ट्रंप को एहसास हुआ कि वे भारत को डरा-धमका नहीं सकते। यही वजह थी कि उन्होंने मोदी को जन्मदिन की बधाई भेजी, जिस पर मोदी ने भी विनम्रता से जवाब दिया।
जॉर्ज येओ ने रेखांकित किया कि हम अब एक बहुध्रुवीय दुनिया को आकार लेते हुए देख रहे हैं। उन्होंने पहले भी ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीतियों की आलोचना की थी, जो दशकों के मुक्त व्यापार को समाप्त करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करने का जोखिम पैदा करती हैं। येओ के अनुसार, ट्रंप एक ऐसी पुरानी दुनिया में वापस जा रहे थे जहां व्यापार को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
एक तरफ जहाँ जॉर्ज येओ भारत और पीएम मोदी की बढ़ती ताकत का बखान कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत के कुछ नेता विदेश में ऐसे बयान दे रहे हैं जो देश के हित में नहीं माने जा रहे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कोलंबिया दौरे पर दिए गए बयान, जिसमें उन्होंने भारत के लोकतंत्र के खतरे में होने और भारत के वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने की क्षमता पर संदेह जताया, इसका एक उदाहरण है।
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