भारत-इटली की दोस्ती का नया परचम: साझा भविष्य की ओर मज़बूत कदम
नई दिल्ली: भारत और इटली के बीच संबंधों का नया अध्याय तब लिखा गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी का गर्मजोशी से स्वागत किया। ताजानी की तीन दिवसीय भारत यात्रा, जिसने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊँचाई दी, प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अन्य भारतीय गणमान्य व्यक्तियों के साथ गहन विमर्श का गवाह बनी। जयशंकर ने ताजानी के आगमन का स्वागत करते हुए इस वर्ष उनकी दूसरी भारत यात्रा को दोनों देशों की अटूट प्रतिबद्धता और प्रगाढ़ होती साझेदारी का जीवंत प्रमाण बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत-इटली संबंध न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक सम्मान और साझा वैश्विक दृष्टिकोण पर आधारित हैं, बल्कि एक-दूसरे की विरासत का भी गहरा सम्मान करते हैं।
जयशंकर ने दोनों देशों के बीच राजनीतिक, सामरिक, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष सहयोग, रक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हो रही प्रगति पर प्रकाश डाला। वहीं, ताजानी ने भारत में हाल ही में हुए आतंकी हमले के प्रति इटली की एकजुटता व्यक्त की और G20 के दौरान घोषित आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने की पहल (Counter Terror Financing Initiative) को आगे बढ़ाने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। यह उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में इटली, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण सुरक्षा साझेदार बनकर उभरा है, और आतंकवाद-निरोधक सहयोग में भी दोनों देश घनिष्ठ सहयोगी हैं।
$X (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-इटली दोस्ती की निरंतर मज़बूती पर प्रकाश डाला और 2025-2029 की संयुक्त रणनीतिक कार्ययोजना पर हो रही तेज़ी से प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने ताजानी को सूचित किया कि व्यापार, निवेश, रक्षा, अंतरिक्ष, नवाचार, शिक्षा और लोगों से लोगों के बीच संपर्क के क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि देखी जा रही है। इस अवसर पर, ताजानी ने प्रधानमंत्री मोदी को इतालवी प्रधानमंत्री मेलोनी की ओर से इटली की यात्रा का निमंत्रण सौंपा, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
दूसरी ओर, ताजानी ने स्पष्ट किया कि भारत आज इटली के लिए एक प्राथमिकता वाला देश है। भारत को लंबे समय का भरोसेमंद मित्र बताते हुए, उन्होंने घोषणा की कि इतालवी विदेश मंत्रालय ने भारतीय बाज़ार में औद्योगिक सहयोग और संयुक्त उद्यमों को समर्थन देने के लिए 50 करोड़ यूरो की वित्तपोषण सुविधा शुरू की है। इटली की महत्वाकांक्षा है कि भारत के साथ संरक्षण-उद्योग, मशीनरी, डिज़ाइन, उन्नत विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग को नई गति मिले। दोनों देशों के बीच वर्तमान 14 अरब यूरो के व्यापार को कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ताजानी ने यह भी बताया कि दोनों सरकारें भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। यह स्पष्ट है कि भारत-इटली संबंधों में यह उछाल केवल कूटनीति का परिणाम नहीं, बल्कि एक भू-राजनीतिक वास्तविकता है, क्योंकि भारत एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है और इटली यूरोप में उसका सबसे विश्वसनीय साझेदार बनने की ओर अग्रसर है।
भारत-इटली संबंधों का यह नया अध्याय केवल व्यापार या निवेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सामरिक पुनर्संतुलन का प्रतीक है। इसमें यूरोप की राजनीति, इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा और वैश्विक शक्ति-संतुलन के बीच भारत के बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। आज दुनिया यह देख रही है कि इटली, जो कभी एशिया में चीन या यूरोपीय शक्तियों के इर्द-गिर्द अपनी रणनीतियाँ बुनता था, वह अब भारत को अपना विश्वसनीय रणनीतिक केंद्र मान रहा है। इस महत्वपूर्ण बदलाव के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच बनी व्यक्तिगत केमिस्ट्री और राजनीतिक विश्वास का महत्वपूर्ण योगदान है।
मोदी-मेलोनी समीकरण ने दोनों देशों के बीच जिस सहजता और पारदर्शिता के साथ जुड़ाव स्थापित किया है, वह आज यूरोपीय मंचों पर चर्चा का विषय है। मेलोनी सरकार भारत को केवल एक बाज़ार के रूप में नहीं, बल्कि एक साझा मूल्यों वाले शक्तिशाली लोकतांत्रिक सहयोगी के रूप में देखती है। भारत की बढ़ती शक्ति, निर्णायक नेतृत्व और स्पष्ट वैश्विक दृष्टिकोण ने इटली को यह अहसास कराया है कि भविष्य की रणनीतियों में भारत को केंद्र में रखना ही उसकी सबसे लाभकारी नीति होगी।
सामरिक दृष्टि से, यह साझेदारी चीन को एक स्पष्ट संदेश देती है। इटली ने हाल ही में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से खुद को अलग किया है और अब वह भारत जैसे विश्वसनीय साझेदार के साथ ही भविष्य की भू-राजनीतिक रणनीति बनाना चाहता है। इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच इटली का भारत के साथ खड़ा होना, यूरोप के सुरक्षा समीकरण को एक नया आकार दे रहा है।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है। इंडो-पैसिफिक में स्थिरता के लिए इतालवी नौसेना का भारत के साथ सहयोग, संयुक्त अभ्यास और रक्षा उत्पादन में संभावित सह-विकास परियोजनाएँ यह स्पष्ट करती हैं कि दोनों राष्ट्र अब केवल मित्र नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदार हैं। ताजानी का यह कहना कि इटली भारत की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देना चाहता है, महज़ एक कूटनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक नई विश्व व्यवस्था का संकेत है, जहाँ भारत वैश्विक निर्णयों में एक निर्णायक शक्ति बन चुका है।
कुल मिलाकर, यूरोप में भारत का प्रभाव बढ़ रहा है, और मेलोनी-मोदी संबंधों की गर्मजोशी ने इसमें अद्भुत गति प्रदान की है। यह संबंध केवल मित्रता से कहीं बढ़कर है; यह 20वीं सदी की गुटबाजी से आगे बढ़कर 21वीं सदी का वास्तविक रणनीतिक गठबंधन है। भारत के लिए यह साझेदारी अत्यंत लाभकारी है। यूरोप की तकनीक, डिज़ाइन, रक्षा विशेषज्ञता और निवेश क्षमता अब भारत की प्रगति से सीधे जुड़ रही है। वहीं, इटली के लिए भारत वह साझेदार है जो यूरोप की बदलती राजनीति के बीच उसे स्थिरता, बाज़ार और वैश्विक प्रभाव प्रदान कर सकता है।
संक्षेप में, भारत-इटली संबंधों का यह नया युग एक रणनीतिक यथार्थ है, जिसे मोदी-मेलोनी के मज़बूत नेतृत्व और आपसी विश्वास ने संभव बनाया है। आने वाले वर्षों में, यह साझेदारी एशिया-यूरोप सुरक्षा संरचना को ही बदल सकती है। यह दोस्ती अब महज़ कूटनीति नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला एक वैश्विक गठबंधन बन चुकी है।
-नीरज कुमार दुबे
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