सर क्रीक: एक ज्वलंत विवाद जो पड़ोसियों को बांधे रखता है
भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से चला आ रहा सर क्रीक विवाद, दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय तनाव का एक महत्वपूर्ण पहलू है। यह विवाद, जिसकी जड़ें भारत की स्वतंत्रता से भी पुरानी हैं, अक्सर बड़े भू-राजनीतिक मुद्दों के बीच दब जाता है, परंतु इसका सामरिक, आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व इसे अनवरत प्रासंगिक बनाए रखता है। हालिया खुफिया और नौसेना के खुलासे पाकिस्तान द्वारा सिंध के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में, भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित इस विवादित पट्टी के पास सैन्य परिसरों, छावनी और आपातकालीन हवाई अड्डों के निर्माण की ओर इशारा करते हैं।
तनाव का नया अध्याय: सर क्रीक फिर सुर्खियों में
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को सर क्रीक क्षेत्र में जारी सैन्य निर्माण पर कड़ा संदेश देते हुए चेतावनी दी है कि किसी भी दुस्साहस का जवाब इतना तीखा होगा कि वह इतिहास और भूगोल दोनों को बदल देगा। शस्त्र पूजन के अवसर पर, उन्होंने पाकिस्तान पर जानबूझकर इस पुराने विवाद को भड़काने का आरोप लगाया, जबकि भारत इसे बातचीत से सुलझाने के लिए तत्पर रहा है। गुजरात तट के साथ सामरिक रूप से संवेदनशील सर क्रीक के निकट पाकिस्तान की सैन्य बुनियादी ढांचे में वृद्धि को रक्षा मंत्री ने उसके "अस्पष्ट इरादों और उकसावे वाले रुख" के प्रतीक के रूप में देखा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया है, और इसका उद्देश्य पाकिस्तान के साथ युद्ध छेड़ना नहीं, बल्कि उसकी हवाई रक्षा की कमजोरियों को उजागर करना और भारत की निर्णायक क्षमता को प्रदर्शित करना था।
सर क्रीक: भौगोलिक और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
सर क्रीक, कच्छ के रण के दलदली क्षेत्र में स्थित 96 किलोमीटर लंबी एक जल पट्टी है। भौगोलिक रूप से, यह अरब सागर में मिलने से पहले भारत के कच्छ क्षेत्र और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच एक प्राकृतिक सीमा बनाती है। ऐतिहासिक रूप से ‘बाण गंगा’ के नाम से जानी जाने वाली यह जल पट्टी, ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में एक अधिकारी के नाम पर ‘सर क्रीक’ कहलाई।
राजनाथ सिंह की चेतावनी: इतिहास और भूगोल का परिदृश्य
रक्षा मंत्री की चेतावनी पाकिस्तान के लिए एक स्पष्ट संदेश है। उन्होंने स्मरण कराया कि 1965 के युद्ध में भारतीय सेना ने लाहौर तक पहुंचने की क्षमता दिखाई थी, और आज 2025 में, पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि कराची की ओर जाने वाले रास्तों में से एक सर क्रीक से होकर गुजरता है। दोनों देशों द्वारा समुद्री सीमाओं की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण यह क्षेत्र विवादित बना हुआ है। 78 वर्षों के बाद भी पाकिस्तान द्वारा इस सेक्टर में ‘विवाद पैदा करने’ के प्रयासों पर रक्षा मंत्री ने चिंता व्यक्त की, और इसके सैन्य विस्तार को उसकी मंशा पर सवालिया निशान बताते हुए कहा कि किसी भी दुस्साहस का निर्णायक जवाब दिया जाएगा।
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