रूस-यूक्रेन युद्ध और पाकिस्तान में बाल अधिकारों का संकट: एक तुलनात्मक दृष्टिकोण

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- News Desk
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रूस ने कीव पर किया हमला और पाकिस्तान के बच्चे अपने बुनियादी हक से भी महरूम

पाकिस्तान के बच्चों का भविष्य अंधकारमय: 2.5 करोड़ बच्चे शिक्षा से वंचित, क्या देश की तरक्की का रास्ता बंद?

पाकिस्तान, सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से जूझता एक देश, आज अपने सबसे अनमोल खजाने – बच्चों – को उनके बुनियादी अधिकार से भी वंचित कर रहा है। यह वंचितता किसी छोटे-मोटे आंकड़े की नहीं, बल्कि करोड़ों की है, जो शिक्षा की रोशनी से कोसों दूर हैं।

पाकिस्तान शिक्षा संस्थान (पीआईई) की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने देश की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2.5 करोड़ से अधिक बच्चे आज भी स्कूल की दहलीज पर कदम नहीं रख पाए हैं, और इनमें से 2 करोड़ बच्चे ऐसे हैं जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह ही नहीं देखा। इस गंभीर परिदृश्य में एक और दर्दनाक सच यह है कि नामांकित न होने वालों में 1,084 ट्रांसजेंडर बच्चे भी शामिल हैं, जिन्हें शायद मुख्यधारा से जोड़ने में समाज अभी भी पीछे है।

प्रांतों के आंकड़े इस समस्या की भयावहता को और स्पष्ट करते हैं। पंजाब की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहाँ 96 लाख बच्चे स्कूल से बाहर हैं। हैरानी की बात यह है कि यहाँ 47 लाख लड़के और 48 लाख लड़कियाँ शिक्षा से वंचित हैं, जो लैंगिक असमानता की ओर भी इशारा करता है। सिंध प्रांत में 78 लाख बच्चे शिक्षा के इस अधिकार से महरूम हैं, जिनमें 37 लाख लड़के और 40 लाख लड़कियाँ शामिल हैं। खैबर पख्तूनख्वा (केपी) में 49 लाख बच्चे नामांकित नहीं हैं, जहाँ 20 लाख लड़के और 29 लाख लड़कियाँ शिक्षा से दूर हैं। बलूचिस्तान में भी 29 लाख बच्चे शिक्षा से वंचित हैं, जिनमें 14 लाख लड़के और 15 लाख लड़कियाँ शामिल हैं। इन आंकड़ों से यह साफ है कि लड़कियों को उनके शैक्षिक हकों से कहीं ज्यादा दूर रखा जा रहा है, जो देश के भविष्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।

यहां तक कि राजधानी इस्लामाबाद में भी, 6 से 16 वर्ष की आयु के 89,000 बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। इनमें 47,849 लड़के और 41,275 लड़कियाँ शामिल हैं, जो यह दर्शाता है कि समस्या सिर्फ पिछड़े इलाकों तक ही सीमित नहीं है।

यह परिदृश्य और भी निराशाजनक तब हो जाता है जब पीआईई रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यह समस्या थमने वाली नहीं है। बल्कि, हर साल स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या में 20,000 की वृद्धि हो रही है। यह लगातार बढ़ता आंकड़ा पाकिस्तान के भविष्य पर एक गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या इन बच्चों के बिना देश तरक्की की राह पर आगे बढ़ पाएगा? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब खोजने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।


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